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Uttarakhand: मनेरी भाली-2...टनल के पानी से बनती रहेगी बिजली, भीतर रिसाव मरम्मत का कार्य भी होगा
Sat, 10 Jan 2026 08:15 AM IST
रेनू सकलानी
आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Sat, 10 Jan 2026 08:15 AM IST
सार
बिजली परियोजना मनेरी भाली-2 की हेड रेस टनल के पानी से बिजली बनती रहेगी। भीतर रिसाव मरम्मत का कार्य भी होगा।
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बिजली
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तराखंड में यूजेवीएनएल की 304 मेगावाट की सबसे बड़ी बिजली परियोजना मनेरी भाली-2 की हेड रेस टनल के पानी से बिजली बनती रहेगी और इसकी मरम्मत भी चलती रहेगी। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने इसे मंजूरी दे दी है। इसके तहत रिमोट आधारित व्हीकल की मदद से मरम्मत का काम किया जाएगा।
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दरअसल, एमबी-2 की हेड रेस टनल में गमरी गाड़ क्षेत्र कम ओवरबर्डन (20–22 मीटर) वाला है। यह सक्रिय श्रीनगर थ्रस्ट (भू-गर्भीय भ्रंश रेखा) के बेहद नजदीक स्थित है। वर्ष 2021 से यहां हेड रेस टनल से पानी का रिसाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले यह रिसाव 229 लीटर प्रति सेकंड था जो कि बढ़कर 1602 लीटर प्रति सेकेंड तक पहुंच गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह रिसाव मिट्टी के कटाव और जमीन के भीतर रिक्त स्थान को जन्म दे रहा है, जिससे टनल की संरचनात्मक सुरक्षा और आसपास की जमीन की स्थिति पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
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टनल की मरम्मत करने के लिए इसे कम से कम छह माह बंद करना पड़ता, जिससे प्रदेश को करीब 50 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होता, लेकिन अब नियामक आयोग ने जिस 12.27 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, उसके तहत रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) के माध्यम से हेड रेस टनल की जांच के लिए 2.65 करोड़, गमरी गाड क्षेत्र में भू-सुदृढ़ीकरण, ग्राउंड विकास और रिसाव जल के चैनलाइजेशन कार्यों के लिए 9.62 करोड़ की सैद्धांतिक मंजूरी दी है।
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आरओवी में हाई-डेफिनिशन कैमरा, सोनार इमेजिंग सिस्टम और डाई इंजेक्शन तकनीक जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी। इनसे दरारें, लीकेज वाले स्थान, बारीक नुकसान और संरचनात्मक विकृति की सटीक पहचान की जाएगी। यह जांच फरवरी 2026 तक पूरी की जाएगी।