उत्तराखंड: बर्फ में समा गया देश का आखिरी गांव
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देश का अंतिम गांव पूरी तरह से बर्फ में दबा है। स्थिति यह है कि यहां सभी मकान बर्फ से ढके हैं और ढूंढे नहीं मिल रहे हैं।
देश के अंतिम गांव माण में बर्फ हटाने के लिए करीब एक माह का समय लग जाएगा। निचले क्षेत्रों में रहे रहे ग्रामीण अपने गांव माणा में मकानों की स्थिति का जायजा लेने पहुंच रहे हैं।
माणा गांव के कई ग्रामीण 15 अप्रैल को हनुमान चट्टी से कई हिमखंडों को पार कर गांव पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अपने मकान ढूंढे नहीं मिले और वे वहां से लौट गए। माणा गांव निवासी कमल रावत भी बर्फ से हुए नुकसान को देखने के लिए यहां पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि गांव में इतनी बर्फ कभी नहीं देखी। पचास साल बाद ऐसी बर्फबारी देखी है। एक माह बर्फ हटाने में ही लग जाएगा। बदरीनाथ यात्राकाल में दूध का व्यवसाय करने वाले ग्रामीण हरीश का कहना है कि मवेशियों को छिनका से माणा गांव पहुंचाने की चिंता है।
बदरीनाथ के समीप है माणा गांव
वहीं बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह भी अपना मकान देखने यहां पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि मकान ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। आम रास्ते भी बर्फ से ढके हुए हैं।
माणा गांव के ग्रामीण यात्राकाल में धाम में दूध, दाल, सब्जी और ऊनी वस्त्र यात्रियों को उपलब्ध कराते हैं। बदरीनाथ भगवान को ओढ़ाया जाने वाले कंबल भी यही ग्रामीण बनाते हैं।
माणा गांव में हैं कई दर्शनीय स्थल
माणा गांव में कई दर्शनीय स्थल भी हैं। बताते हैं कि पांडव इसी गांव से होते हुए स्वर्ग गए थे। माणा गांव में भीम पुल, चरण पादुका, शेष नेत्र और व्यास गुफा भी है। बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा कर यात्री इन दर्शनीय स्थलों को देखने पहुंचते हैं। तीर्थयात्री देश के अंतिम गांव में चाय की चुस्कियां लेना नहीं भूलते।