हार के अंतर में बहुगुणा को मिली भारी बढ़त
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टिहरी में आपदा पुनर्निर्माण एवं पुनर्वास का मुद्दा मोदी लहर पर सवार होकर बहुगुणा परिवार की साख पर भारी चोट कर गया।
दो बरस पहले हुए उपचुनाव में 23 हजार मतों के करीबी अंतर से हारे साकेत बहुगुणा को माला राज्यलक्ष्मी से 1 लाख 90 हजार से पटखनी दी है।
संसदीय क्षेत्र की 14 विधानसभाओं से चकराता छोड़कर अन्य सभी पर साकेत बुरी तरह पिछड़े हैं। दो दिन पहले जिन कांग्रेस विधायकों को संसदीय सचिव का ताज पहनाया उनके क्षेत्रों में बहुगुणा को सर्वाधिक नुकसान उठाना पड़ा है।
कांग्रेस एक बार फिर नाकाम
टिहरी संसदीय सीट पर भाजपा की बड़ी जीत हुई है। यहां राजशाही परिवार और बहुगुणा परिवार की साख दांव पर थी। राजशाही परिवार के दबदबे को तोड़ने में कांग्रेस एक बार फिर नाकाम रही है।
इस सीट पर कांग्रेस के हर पैंतरा उलटा पड़ा है। आपदा का दंश झेल रही जनता ने बहुगुणा परिवार से अपनी नाराजगी मतदान के दिन दिखाई। 2012 संसदीय उपचुनाव में जिन सीटों पर साकेत ने बढ़त बनाई थी इस बार वहां भी उन्हें मुंह की खानी पड़ी।
उत्तरकाशी जनपद की तीनों विधानसभाओं में साकेत लगभग 32 हजार मतों से साकेत पीछे रहे जहां 2012 उपचुनाव में साकेत चार हजार से आगे थे।
पुनर्निर्माण कार्यों में देरी का नतीजा
यह खामियाजा चार धाम यात्रा मार्ग और पुनर्निर्माण के कार्यों में देरी का नतीजा है। पर्वतीय सीटों पर कांग्रेस की बेहतर स्थिति इस बार बदहाल हो गई। टिहरी में कांग्रेस जहां बढ़त बनाए हुए थी वहां भी हार का सामना करना पड़ा है।
कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह की विधानसभा से कांग्रेस को साढ़े तीन हजार की बढ़त तो मिली लेकिन उपचुनाव में यहां 10 हजार की बढ़ता थी जो घटी है।
जिनको मिला ताज उनके यहां गिरी गाज
टिहरी के तीन विधायकों राजपुर से राजकुमार, रायपुर से उमेश काऊ और प्रतापनगर से विक्रम सिंह नेगी को संसदीय सचिव का ताज दिया गया है। तीनों विधायक पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के करीबी माने जाते हैं जिसके चलते उनको प्रमोट किया गया।
लोकसभा चुनाव के नतीजों में इन तीनों विधायकों के क्षेत्रों में साकेत बहुगुणा बुरी तरह से हारे हैं। संसदीय उपचुनाव में प्रतापनगर से 15 सौ मत आगे रहे साकेत इस बार सात हजार मतों से पिछड़े हैं।
उमेश शर्मा की सीट 2012 में दस हजार का अंतर बढ़कर लगभग तीस हजार पहुंच गया तो राजकुमार की सीट पर पांच हजार की हार का अंतर 20 हजार पहुंचा है।