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मसूरी में 'जंगल' की जमीन हड़पने की कोशिश
विजेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Wed, 20 Nov 2013 11:38 AM IST
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अनुमति बगैर वन भूमि पर निर्माण
इसके लिए मंत्रालय की अनुमति बगैर वन भूमि पर निर्माण शुरू कर दिया गया। सेंट्रल रीजन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने जांच में निर्माण कार्य वन संरक्षण अधिनियम को ताक पर रख किए जाने की बात दोहराते हुए निर्माण कार्य को तत्काल पर रोके जाने की सिफारिश की है।
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केंद्रीय वन मंत्रालय को इस संबंध में शिकायत मिली थी, जिसके बाद मंत्रालय के मुख्य वन संरक्षक वाईकेएस चौहान ने जांच की। रिपोर्ट में सरकारी विभागों की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा किया गया है। मंत्रालय ने जांच के बाद अपर प्रमुख वन संरक्षक नोडल अफसर को कड़ा पत्र लिखा है। इसमें साल के वृक्षों को अवैध रूप से काटे जाने पर भी सवाल उठाया है।
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चौहान के मुताबिक गोदावर्मन केस के अनुसार जिस भूमि का स्वरूप वन होगा, उस पर भी वन अधिनियम लागू होगा। जिस निजी भूमि पर निर्माण हो रहा है, उसका स्वरूप वन भूमि है। इसके साक्ष्य भी हैं। यहां पर कोई भी निर्माण करना है तो उसकी अनुमति मंत्रालय से लेनी होगी। पूर्व में हुए निर्माणों में भी अनुमति ली गई थी।
पर्यावरण मंत्रालय भेजी जानकारी
राज्य सरकार को सूचित करने के साथ ही सेंट्रल रीजन कार्यालय ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय दिल्ली को भी इस गड़बड़ी के संबंध में जानकारी भेजी है।
मंत्रालय ने असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट (एफसी) को पत्र लिख इस उल्लंघन के संबंध में जानकारी दी है। मंत्रालय की उप संरक्षक प्राची को इस संबंध में वन विभाग से जो अभिलेख मिले, उनमें भी गड़बड़ी मिली है। सामने आया है कि क्षेत्रीय अधिकारियों ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर मानचित्र बनाया है।
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