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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Mahatma Gandhi death anniversary: bapu Memories with Uttarakhand, visited Bageshwar in 1929, spent 14 days in Kausani

बापू की पुण्यतिथि: उत्तराखंड से जुड़ीं हैं यादें, 1929 में किया था बागेश्वर का भ्रमण, कौसानी में बिताए थे 14 दिन

Sun, 30 Jan 2022 10:37 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 30 Jan 2022 10:37 AM IST
सार

बागेश्वर की धरती आजादी की जंग के अहम आंदोलन कुली बेगार की गवाह रही है। वर्ष 1921 में उत्तरायणी पर्व पर स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों की ओर से लागू काले कानून कुली बेगार की प्रतियां सरयू नदी में बहाईं थीं और इस प्रथा का अंत हुआ।

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Mahatma Gandhi death anniversary: bapu Memories with Uttarakhand, visited Bageshwar in 1929, spent 14 days in Kausani
महात्मा गांधी - फोटो : iStock

विस्तार

बागेश्वर जिला आजादी के पुरोधा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अनेक यादों का गवाह है। वर्ष 1929 में बापू ने जिले का भ्रमण किया था। इस दौरान वह कौसानी में 14 दिन तक रुके थे और अनासक्ति योग की प्रस्तावना लिखी थी। बागेश्वर में उन्होंने स्वराज भवन की नींव डाली थी। स्वराज भवन और अनासक्ति आश्रम आज जिले की प्रमुख धरोहरों के रूप में बापू के बागेश्वर आगमन के गवाह बनकर लोगों को प्रेरणा दे रहे हैं।

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सरयू नदी में बहाईं थीं काले कानून कुली बेगार की प्रतियां
बागेश्वर की धरती आजादी की जंग के अहम आंदोलन कुली बेगार की गवाह रही है। वर्ष 1921 में उत्तरायणी पर्व पर स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों की ओर से लागू काले कानून कुली बेगार की प्रतियां सरयू नदी में बहाईं थीं और इस प्रथा का अंत हुआ। कुली बेगार की सफलता से प्रभावित होकर बापू स्वयं बागेश्वर आए थे। वह जून के दूसरे पखवाड़े में कौसानी पहुंचे थे और 22 जून को बागेश्वर के लिए रवाना हुए। कौसानी से गरुड़ तक की दूरी उन्होंने वाहन से तय की थी।
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आगे की यात्रा के लिए डोली की मदद ली। नगर के चौक बाजार स्थित पीपल के पेड़ की छांव में उन्होंने कुछ देर विश्राम किया था। बागेश्वर पहुंचने पर स्व. श्याम लाल साह के नेतृत्व में शांति लाल त्रिवेदी, बद्री दत्त पांडेय, विक्टर मोहन जोशी आदि ने उनका स्वागत किया। बापू ने बागेश्वर के डाक बंगले में एक रात गुजारी थी और नुमाइशखेत में स्वराज भवन की नींव रखी थी। इसी स्वराज भवन का शुभारंभ स्वतंत्रता सेनानी विक्टर मोहन जोशी ने किया था। स्वराज भवन परिसर में लगी बापू की प्रतिमा उनके बागेश्वर आगमन की याद दिलाती है। 

वहीं, कौसानी के सौंदर्य से अभिभूत बापू ने इसे भारत के स्विट्जरलैंड की संज्ञा दी थी जहां प्रवास के दौरान उन्होंने योग पुस्तक की प्रस्तावना लिखी थी, वहां पर बने अनासक्ति आश्रम में बापू की यादों को सहेजे हुए करीब 150 तस्वीरें हैं। इसके अतिरिक्त महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ा साहित्य भी यहां धरोहर के रूप में रखा गया है। अनासक्ति आश्रम में सुबह-शाम बापू की प्रिय रामधुन बजाई जाती है, जिसमें स्थानीय लोगों के साथ सैलानी भी भाग लेकर आजादी के महानायक की यहां बसी यादों को आत्मसात करते हैं। 


 

युवाओं को प्रेरित करता है बापू का जीवन 

महात्मा गांधी का जीवन देशभक्ति, सत्य, अहिंसा, सादगी और परोपकार की प्रेरणा देता है। देश को आजाद कराने के लिए उनके योगदान को देश कभी भूल नहीं सकता है। उन्होंने अंग्रेजों के अत्याचारों का जवाब अहिंसा रूपी हथियार से दिया था। वह समाज के हर वर्ग और हर तबके के लोगों के आदर्श हैं। युवाओं को भी उनके जीवन से आदर्श नागरिक बनने की प्रेरणा मिलती है। 

महात्मा गांधी का जीवनवृत्त एक पाठशाला है। उनका मानना था कि जीवन में सिद्धांत और व्यवहार में एकरूपता होना बहुत जरूरी है। उन्होंने सच को सिद्धांत और अहिंसा को व्यवहार में शामिल कर समानता का जीवन जीने का संदेश दिया। अपने सिद्धांतों से उन्होंने अंग्रेजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। उनके दिखाए मार्ग का अनुसरण करने पर कठिन से कठिन चुनौती को भी पार करने की प्रेरणा मिलती है।
- कमल कवि कांडपाल

महात्मा गांधी ने नेतृत्व कौशल और सादगी भरे व्यवहार की अनूठी मिसाल पेश कर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में पूरे देश को एकजुट किया और अलग धर्म, जाति और विभिन्न प्रांतों में बंटे देश को आजादी के रंग में रंग दिया। हथियारों के बल पर राज करने वालों को अहिंसा के जोर से देश छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। उनका जीवन सदैव बुराई से लड़ने और अत्याचार का डटकर सामना करने के लिए प्रेरित करता रहेगा।  
- भुवन फर्स्वाण

जिस दौर में समाज चुप रहने और अंग्रेजों के दमन को सहने में सलामती समझता था, महात्मा गांधी ने ऐसे समय में लोगों को नई दृष्टि दी और हिम्मत से बोलना सिखाया। धोती पहनने वाले फकीर के पीछे लाखों की तादाद में लोगों का अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट होना, उनके जीवन की महानता को दर्शाता है। उनके विचार, सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने का नजरिया और समाज को एक समान भाव से देखना, आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
- भाष्कर भौर्याल

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