उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के राज्यपाल कोश्यारी का नाम याचिका से हटाया, ये है पूरा मामला
- पूर्व मुख्यमंत्रियों के किराए भत्ते का बकाया माफ करने संबंधी अध्यादेश का मामला
- हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 26 नवंबर की तिथि नियत की
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हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों का बकाया माफ करने संबंधी अध्यादेश के मामले में दायर जनहित याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 26 नवंबर की तिथि नियत की है। सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र के राज्यपाल व पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के अधिवक्ता ने याचिका से उनका नाम हटाने का प्रार्थना पत्र दायर किया, जिसे कोर्ट ने रिकॉर्ड में लेते हुए याचिका से कोश्यारी का नाम हटा दिया।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार रूरल लिटिगेशन संस्था ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर पांच सितंबर को जारी उस अध्यादेश को चुनौती दी थी जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों का आवास सहित अन्य सुविधाओं का बकाया माफ करने का निर्णय लिया गया था।
याचिका में कहा गया कि पूर्व में हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास खाली करने व सुविधाओं का बकाया ब्याज सहित बाजार मूल्य की दर पर किराया भरने के आदेश दिया था। कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व सीएम व दिवंगत एनडी तिवारी, पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा व भुवन चंद्र खंडूड़ी को आवास खाली करने का आदेश भी दिया था।
बाद में दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी को नोटिस की श्रेणी से बाहर कर दिया गया था। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने संविधान के अनुच्छेद-14 के समानता का अधिकार का हवाला देते हुए कहा कि सरकार का काम जनकल्याण होता है मगर सरकार सिर्फ पांच लोगों को ही फायदा पहुंचाने के मकसद से कानून क्यों बनाना चाहती है।