खतरे के निशान पर पहुंची महाकाली, भारत और नेपाल में मचा सकती है तबाही
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महाकाली का जलस्तर चेतावनी के निशान के पास पहुंच गया है। इसे विशेषज्ञ बड़े खतरे का संकेत बता रहे हैं। मानना है कि अगर यह नदी निशान से ऊपर पहुंची तो भारत और नेपाल दोनों में तबाही मचा सकती है।
शुक्रवार को महाकाली का जलस्तर 888.70 मीटर आंका गया, जबकि महाकाली में चेतावनी का निशान 889 मीटर पर और खतरे का निशान 890 मीटर पर लगा है। इतने उफान पर बह रही महाकाली को पार करने का सिर्फ नाव ही साधन है।
हल्दू घाट के पास उफनाई नदी को रोज कई लोग नाव से आर-पार करते हैं। झूलाघाट से लेकर टनकपुर तक करीब 50 किलोमीटर के हिस्से में भारत और नेपाल को जोड़ने के लिए कोई झूलापुल नहीं है।
भारत और नेपाल के लोग हल्दू घाट से रोज आवाजाही करते हैं। नेपाल के गांवों से लोग सौरा, हल्दू, भौरा, रावतगढ़ और तड़ेमिया गांव तक नाव के जरिए आते हैं और वहां की दुकानों से सामान खरीदकर इसी नाव से वापस जाते हैं।
कुछ लोग सल्ला तक पैदल आकर पिथौरागढ़ बाजार भी पहुंचते हैं। क्षेत्र के युवा सामाजिक कार्यकर्ता मनोज चंद ने कहा कि उफनाई महाकाली को नाव से पार करना जोखिमपूर्ण है।
यह किसी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है। झूलाघाट से पंचेश्वर की तरफ झूलापुल बनाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। एसडीएम एसके पांडे का कहना है कि जब नदी का प्रवाह कम होता है, तब नाव से पार करने में खतरा नहीं है। इस समय नदी का प्रवाह बढ़ गया है। ऐसे में नाव चलाने पर रोक लगाई जाएगी।
इधर, जानकारी मिली है कि हल्दू घाट क्षेत्र के लोगों ने कभी भी झूलापुल निर्माण की मांग नहीं की है, जबकि महाकाली में द्वालीसेरा, पीपली में झूलापुल बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। नेपाल सीमा पर महाकाली के किनारे एसएसबी की अग्रिम चौकियां हैं। इन चौकियों से आर-पार जाने वालों पर नजर रखी जाती है।