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उत्तराखंड के हर जिले में होगी मैगी की सैंपलिंग
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 02 Jun 2015 01:22 PM IST
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मैगी नूडल्स में निर्धारित मात्रा से ज्यादा लेड और मोनोसोडियम गलूटामेट (एमएसजी) होने के संदेह में उत्तराखंड के सभी जिलों में नमूने लिए जाएंगे।
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खाद्य सुरक्षा एवं मानक (पैकेजिंग एंड लेबलिंग) एक्ट-2011 के तहत उत्तर प्रदेश में मैगी के नमूनों में निर्धारित मात्रा से कहीं अधिक लेड और एमएसजी मिला था, जिसके बाद केंद्र ने सभी राज्यों को अपने स्तर पर सैंपलिंग के आदेश दिए हैं। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने सोमवार को हर जिले में प्रतिष्ठित विक्रय संस्थानों से मैगी की सैंपलिंग करने के निर्देश जारी किए हैं।
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भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने उत्तर प्रदेश में मैगी के सैंपल की जांच रिपोर्ट को आधार बनाते हुए सभी राज्यों को दिशा निर्देश जारी किए हैं। एफएसएसएआई ने 25 मई को पत्र भेजकर जनहित में मैगी नूडल्स के अधिक से अधिक सैंपल खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत जांचने के आदेश दिए हैं।
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प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओमप्रकाश ने बताया कि एफएसएसएआई के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा आयुक्त को सभी जिलों में मैगी के सैंपल एकत्रित करने के निर्देश दिए हैं।
ज्यादा एमएसजी से रक्त प्रवाह पर पड़ता है असर
एमएसजी स्वाद को बढ़ाने का काम करता है, इसके अधिक इस्तेमाल से रक्त प्रवाह पर असर पड़ता है। जिस खाद्य पदार्थ में यह होता है उसे बार-बार खाने का मन करता है। लेकिन अत्यधिक सेवन सिरदर्द बढ़ाने के साथ एकाग्रता को प्रभावित करता है। जरूरत से ज्यादा लेड कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।