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चार्ज संभालते ही नए डीजीपी ने बताया अपना विजन

Sun, 01 May 2016 03:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 01 May 2016 03:04 AM IST
सार

  • कहा, कानून व्यवस्था और अधिक चुस्त दुरुस्त करना प्राथमिकता

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MA ganpati take charge of uttarakhand DGP.
एमए गणपति - फोटो : AmarUjala

विस्तार

1986 बैच के आईपीएस एमए गणपति ने शनिवार को राज्य के नौवें पुलिस महानिदेशक का चार्ज संभाल लिया। डीजीपी गणपति ने कहा कि पुलिसिंग को और अधिक बेहतर बनाने के साथ कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त रखने को पहली प्राथमिकता बताया।

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शनिवार देर शाम पुलिस मुख्यालय में आयोजित समारोह में डीजीपी पद से रिटायर हुए बीएस सिद्धू ने नए डीजीपी गणपति को चार्ज दिया। वर्ष 2010 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से नवाजे जा चुके डीजीपी एमए गणपति ने कहा कि पुलिस के लिए कानून व्यवस्था को बनाए रखना सबसे पहला काम होता है।
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उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी ईमानदारी और पूरी क्षमता के साथ काम कर जनता के बीच विश्वास हासिल करें। इसके अलावा ऐसी कार्यप्रणाली विकसित करें कि अपराधियों में भी पुलिस का खौफ पैदा हो। इससे पुलिसकर्मियों के साथ कई बार होने वाली अभद्रता की घटनाएं भी रुकेंगी। इससे पहले रिटायर होने पर पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू को विदाई दी गई। समारोह में अपर पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, रामसिंह मीणा, अशोक कुमार, आईजी संजय गुंज्याल समेत कई आईपीएस, पीपीएस अफसर और पुलिसकर्मी शामिल रहे।

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ये है नए डीजीपी एमए गणपति का प्रोफाइल

MA ganpati take charge of uttarakhand DGP.
एमए गणपति - फोटो : AmarUjala

- जेएनयू दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट
- दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी
- वर्ष 1986 में आईपीएस अफसर बने, उत्तर प्रदेश काडर मिला
- मुरादाबाद में एसपी सिटी, सोनभद्र व हरदोई के पुलिस अधीक्षक की जिम्मेवारी निभाई
- इलाहाबाद, मेरठ, नैनीताल और कानपुर आदि जिलों में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की कमान भी संभाली
- 1999 में सीबीआई में प्रतिनियुक्ति पर तैनाती
- इसके बाद वे राज्य में लौटे और पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था बने
- 2009 से लगभग दो साल तक पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल परिक्षेत्र रहे
- 2011 में एडीजी प्रशासन बने
- इसी साल दोबारा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली गए
- दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव (नक्सलवाद) और फिर संयुक्त सचिव आंतरिक सुरक्षा बने
- अब राज्य में लौटे और उन्हें पुलिस महानिदेशक की जिम्मेदारी मिली
- 2010 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी नवाजे जा चुके हैं

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