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ढाई किलों की किताब बताएगी पाकिस्तान में सिखों की वीरगाथा

Thu, 03 Mar 2016 10:15 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 03 Mar 2016 10:15 PM IST
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"Lost Heritage-The Sikh legacy in Pakistan,"  book release.

ढाई किलो से अधिक वजन की ‘लॉस्ट हैरीटेज-द सिख लीगेसी इन पाकिस्तान’ पाकिस्तान में सिक्खों की वीरगाथा आपको बताएगी। 504 पृ्ष्ठ की यह किताब अपने आप में प्रेम के साथ घोर परिश्रम का परिणाम है।

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उत्तराखंड के राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पाल ने बृहस्पतिवार को राजपुर मार्ग स्थित एक होटल में इस पुस्तक (लॉस्ट हैरीटेज-द सिख लीगेसी इन पाकिस्तान) का विमोचन किया।
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राज्यपाल डा. केके पाल ने कहा कि ‘लॉस्ट हैरीटेज-द सिख लीगेसी इन पाकिस्तान’ अद्भुत पुस्तक है। कहा कि लेखक की सोच तो बड़ी है ही, साथ में इसमें गहराई और ऊंचाई दोनों ही समाहित हैं।
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बताया कि अविभाजित भारत में 1801 से 1829 तक महाराजा रणजीत सिंह का साम्राज्य और शासन व्यवस्था अतुलनीय श्रेणी की थी।

वह गौरवशाली काल था, जिसने भारत का नाम दुनिया में फैलाया। महाराजा रणजीत सिंह ने अपने शासनकाल में मजबूत राज्य व्यवस्था के साथ ही संपन्नता, समृद्धि और कल्याण पर जोर दिया। कृषि, वास्तु, उद्यम, साहित्य, शिक्षा व कला के क्षेत्र में अपार तरक्की हुई।

डा. पॉल ने कहा कि पंजाबियत में सांप्रदायिकता, संकीर्णता व संकुचित सोच के लिए कभी स्थान नहीं रहा, इसलिए आज के पाकिस्तान में महान सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, वास्तु अवशेष बचे हैं।

महान इतिहासकार ऑरनॉल्ड टायनबी को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि भूगोल जहां इतिहास बनाता है, वहीं बीसवीं सदी में इतिहास भी भूगोल का निर्माण कर रहा है।

लेखक अमरदीप सिंह ने कहा कि आज का जो पाकिस्तान है, वहां एक समय सिख साम्राज्य था, इसलिए धार्मिक, सांस्कृतिक, साहित्य, शिक्षा, इमारत संबंधी विरासत वहां पर कायम है। आज वह महान विरासत उपेक्षित है।

इस विरासत को समझना बहुत जरूरी है। समूचे पंजाबी समुदाय और प्रगतिशील वर्ग को ऐसी विरासत को सहेजकर रखना होगा। लेखक ने अपनी लंबी पाकिस्तान यात्रा और वहां पर बेहद समृद्ध पड़ी विरासत की उपेक्षा को बयां किया।

उन्होंने कहा कि इमारतें खंडहरों में तब्दील हो गई हैं। साथ ही उन पर कब्जा भी हो गया है। हालांकि वहां का प्रगतिशील समाज मंदिरों, गुरुद्वारों, जैन व बौद्ध केंद्रों को रिवाइव करवा रहे हैं।


अमरदीप सिंह का कहना था कि दोनों देशों के बीच शांति होनी चाहिए। सामाजिक स्तर मेल मिलाप आवश्यक है। इससे सांस्कृतिक संपन्नता बढ़ेगी।

विशिष्ट अतिथि मधुबन होटल ग्रुप के चेयरमैन एसपी कोचर ने कहा कि अपनी संस्कृति, भाषा, बोली और विरासत को भूलना चिंताजनक है।

आज हम खुद की पहचान ही भूल गए हैं। गुरु गोबिंद सिंह के महान जीवन व फलसफे से प्रेरणा लेकर हमें सौहार्द व सद्भाव की स्थापना करनी होगी।

संचालन करते हुए हरपाल सिंह सेठी ने कहा कि हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने के लिए धर्म की कट्टरता छोड़नी होगी।

इस मौके पर विधायक हरबंस कपूर, पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन अशोक वर्मा, बृजेंदर सिंह, अमरजीत सिंह, देवेंद्र सिंह, ब्रिगेडियर केजी बहल, बलबीर सिंह व विरेंद्र पाल सिंह एएस रत्रा आदि ने विचार व्यक्त किए।

सर्व धर्म समभाव समारोह होगा आयोजित
केंद्रीय श्री गुरु सिंह सभा हरपाल सिंह सेठी ने बताया कि जल्द प्रदेश में सभा की तरफ से सर्व धर्म समभाव कार्यक्रम किया जाएगा।

इसका आयोजन राष्ट्रीय स्तर का होगा। इससे सामुदायिक एकता की धारा बहेगी।

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