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बीएसएफ से बर्खास्त डिप्टी कमांडेंट ने ली थी देश रक्षा की शपथ, लेकिन इस वजह से बन गया कानून का दुश्मन

Thu, 03 Oct 2019 02:29 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश शर्मा, अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 03 Oct 2019 02:29 PM IST
सार

  • उजियारे में सफेदपोश, रात में ओढ़ लेता अपराध की चादर
  • बीएसएफ से बर्खास्त वीरेंद्र के खिलाफ पुलिस को नहीं मिला एक भी मुकदमा
  • आरोपी वीरेंद्र ने दिल्ली क्षेत्र में प्रॉपर्टी डीलर के रूप में बना रखी है पहचान

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loot in Abhimanyu Cricket Academy dismissed deputy commandant of bsf involved
पकड़े गए आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीएसएफ से बर्खास्त डिप्टी कमांडेंट वीरेंद्र ठाकुर दोहरी जिंदगी जी रहा था। दिन में उसकी छवि प्रॉपर्टी डीलर की थी, लेकिन रात में वह अपराध की चादर ओढ़ लेता था। पुलिस तो इसके लंबे समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय होने का दावा कर रही है, लेकिन इसके खिलाफ अभी तक कहीं भी एक मुकदमा सामने नहीं आया है।  

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नई दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में पत्नी और बेटी के साथ किराए के मकान में रहने वाले वीरेंद्र ठाकुर को पुलिस ने पत्नी और बेटी के साथ गिरफ्तार किया था। वह परिवार के साथ कहीं जा रहा था। पुलिस की मानें तो यही गिरोह का सरगना है। पूछताछ में दून से जुड़ी चार घटनाएं प्रकाश में आई हैं।
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पहाड़ गंज में आरोपी की छवि प्रॉपर्टी डीलर की

इनमें ईश्वरन और आरटीओ कर्मचारी के घर तो लूटपाट की, लेकिन बिल्डर और एक चिकित्सक के घर डाका डालने की इनकी कोशिश नाकाम हो गई। पहाड़ गंज में इसकी छवि प्रॉपर्टी डीलर की है। वर्ष 2000 में बीएसएफ से बर्खास्त होने के बाद इसने प्रॉपर्टी के काम से खुद को जोड़ लिया था।


वर्ष 1995 में परीक्षा पास कर बीएसएफ में डिप्टी कमांडेंट बने वीरेंद्र ने देश की रक्षा की शपथ ली थी। उसकी तैनाती जम्मू-कश्मीर में रही है। पांच साल की नौकरी के बाद इसकी छवि ऐसी बदरंग हुई तो उसके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई हुई। वह कब कानून व्यवस्था का दुश्मन बन गया, इसका रिकार्ड पुलिस के पास भी नहीं है।

वीरेंद्र ने ऐसा कोई मौका नहीं दिया, जिससे शक किया जा सके

पुलिस भी गैंग के सदस्याें से दून के अलावा किसी दूसरे राज्य की घटना का इकबाल नहीं कर पाई है। डकैती के आरोपों को लेकर खुद वीरेंद्र की पत्नी और बेटी आरोपों को लेकर हैरत में है। एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने इसकी पत्नी और बेटी से काफी देर तक बातचीत की।

दोनों का कहना था कि वीरेंद्र ने ऐसा कोई मौका नहीं दिया, जिससे उन पर शक किया जा सके। रात में जब भी बाहर जाते तो प्रॉपर्टी संबंधित कहानी बताकर ही निकलते थे। परिजनों ने हैदर के साथ रहने की भी पुष्टि की है। एसएसपी ने बात करने के बाद मां-बेटी को उनके रिश्तेदारों के सुपुर्द कर दिया।

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