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जिस शिपिंग कॉर्पोरेशन से करिअर की शुरुआत, उसी को खरीदने को तैयार कानपुर के रवि मेहरोत्रा

Mon, 15 Mar 2021 01:03 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 15 Mar 2021 01:03 PM IST
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london Forsite Group founder Ravi Kumar Mehrotra ready for buying shipping corporation of india
फोरसाइट के संस्थापक रवि कुमार मेहरोत्रा और उनकी बेटी मंजरी मेहरोत्रा - फोटो : अमर उजाला

सुनने में यह बिल्कुल फिल्मी कहानी जैसा है। 56 बरस पहले जिस कंपनी से 23 साल के एक नौजवान ने मरीन इंजीनियर के रूप में करिअर की शुरुआत की थी, आज अस्सी बरस की उम्र में वह उसी कंपनी को खरीदने की तैयारी में हैं।

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कंपनी है देश का सबसे प्रतिष्ठित जहाजरानी प्रतिष्ठान 'शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया' और उसे खरीदने चले हैं लंदन के जाने माने फोरसाइट ग्रुप के संस्थापक रवि कुमार मेहरोत्रा। कहानी को और रोचक यह बात बनाती है कि उसकी पटकथा सात दशक पहले कानपुर में लिखी गई थी। रवि कुमार मेहरोत्रा न सिर्फ कानपुर में जन्मे और पढ़े-बढे़। लगभग 1500 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार वाला फोरसाइट ग्रुप शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में भारत सरकार के 64 फीसदी हिस्से की नीलामी में शामिल होने वाले अग्रणी नामों में शामिल है।
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अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग में फोरसाइट ग्रुप एक जाना पहचाना नाम है। लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) के परिवहन में माहिर यह ग्रुप शिपिंग के अलावा ड्रिलिंग और फुटवियर इंडस्ट्री में भी सक्रिय है। गुजरात के भावनगर में फोरसाइट समूह दुनिया का पहला सीएनजी टर्मिनल तैयार कर रहा है। वर्ष 1964 से लेकर अगले बीस साल तक शिपिंग कॉर्पोरेशन में ही काम करने वाले मेहरोत्रा ने दस साल तक महत्वाकांक्षी भारत-ईरान तेल पाइपलाइन परियोजना का कार्यभार संभाला था।
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वर्ष 1984 में उन्होंने फोरसाइट समूह की नींव रखी और जहाजों के छोटे बेड़े से काम शुरू किया। उसके बाद तीस साल की अवधि में वह समूह को इस मुकाम तक ले आए हैं। फोरसाइट समूह के संस्थापक व कार्यकारी अध्यक्ष रवि कुमार मेहरोत्रा और उनकी बेटी समूह की डिप्टी चेयरपर्सन मंजरी मेहरोत्रा सेठ के साथ अमर उजाला के कार्यकारी संपादक संजय अभिज्ञान की विशेष बातचीत के अंश पेश हैं...
 
- फोरसाइट समूह की भविष्य की रणनीति में शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का स्वामित्व कितना अहम है? 

रवि मेहरोत्रा: जितना अहम भारत के लिए स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना है उतना ही अहम फोरसाइट ग्रुप के लिए शिपिंग कॉर्पोरेशन है। जलवायु रक्षा की पेरिस संधि में अपने वादे के मुताबिक भारत को अगले दस बरस में अपनी कुल ऊर्जा खपत में नेचुरल गैस का अनुपात मौजूदा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक ले जाना है। नेचुरल गैस पर्यावरण रक्षा के नजरिए से स्वच्छ ईंधन है। कोयला, लकड़ी और कैरोसिन जैसे विकल्प प्रदूषणकारी होते हैं। उन पर निर्भरता घटाना आवश्यक है। दिक्कत यह है कि एशिया में नेचुरल गैस के भंडार मौजूद होने के बावजूद समुद्री दूरी के कारण भारत को पर्याप्त मात्रा में एलएनजी नहीं मिल पाती। भारत में मांग बहुत है। उधर गल्फ में गैस बहुत है। बीच में फासला कम करने के लिए खास तकनीक से लैस जहाज चाहिए जो शून्य से बहुत नीचे के तापमान पर तरल की गई गैस को हजारों किलोमीटर दूर भारत के बंदरगाहों तक पहुंचा सके। ठीक इसी काम में फोरसाइट समूह की महारत है। 

मंजरी मेहरोत्रा सेठ: हम चाहते हैं कि शिपिंग कॉर्पोरेशन का ढांचा और हमारी विशेषज्ञता का संगम हो और आने वाले दस बरस में शिपिंग कॉर्पोरेशन भारत ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी परिवहन बेड़ा बनकर उभरे। जाहिर है कि देश के हजारों नौजवानों के रोजगार के शानदार अवसर इस गठजोड़ से पैदा होंगे। 

-शिपिंग कॉर्पोरेशन जैसे विराट नेटवर्क वाला संस्थान खरीदने के लिए फोरसाइट समूह कितना तैयार है? 

रवि मेहरोत्रा: देखिए हमारा सत्तर फीसदी कारोबार शिपिंग से ही आता है। दुनिया भर में हमारे कंटेनर, टैंकर और बल्क कैरियर जहाज परिवहन सेवा में लगे हैं। लगभग पच्चीस फीसदी कारोबार ड्रिलिंग से और केवल पांच फीसदी फुटवियर जैसी अन्य इकाइयों से है। आबूधाबी नेशनल ऑयल कंपनी के दो रिग हम ऑपरेट करते हैं। ओएनजीसी के लिए चार ऑफशोर रिग और ऑयल इंडिया के लिए एक लैंड रिग का आपरेशन भी हमारे पास है। भावनगर में हम दुनिया का पहला सीएनजी टर्मिनल लगा रहे हैं। शिपिंग कॉर्पोरेशन की नीलामी के लिए हम एक व्यावसायिक गुट यानी कंसोर्शियम में शामिल हैं। इसमें बेल्जियम की एक्समार एनवी और दुबई की जीएमएस शामिल है। फंडिंग का प्रबंध हो चुका है। अनुभव और तकनीकी दक्षता भी मौजूद है। ब्रिटेन, यूएइई, चीन, सिंगापुर और भारत में हमारी खासतौर पर व्यावसायिक उपस्थिति है। कुल मिलाकर हमारी तैयारी पूरी है। 
 

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-कोरोना की वजह से वैश्विक इंडस्ट्री अग्निपरीक्षा से गुजरी। फोरसाइट समूह का अनुभव कितना कड़वा रहा? 

रवि मेहरोत्रा: जबर्दस्त चुनौतियां थीं। लेकिन हम दो वजहों से हालात से उबर गए। एक तो हमारे अधिकतर ठेके दीर्घकालिक अवधि के थे। दूसरे, हमारे वित्तीय ढांचे में जोखिम की गुंजाइश कम थी यानी हमारा एसेट एक्सपोजर संतुलित था। 
मंजरी मेहरोत्रा सेठ: कोरोना से बचाव का पूरा श्रेय हमारी टीम को जाता है। संकट के दौरान सबने एकजुट होकर धैर्य दिखाया। 

-शिपिंग कॉर्पोरेशन की मौजूदा स्थिति को आप कैसे देखते हैं? 

रवि मेहरोत्रा: मुझे देखकर थोड़ा अफसोस होता है। आज उसके बेड़े में सिर्फ 60 जहाज रह गए हैं। कभी दुनिया के शीर्ष दस में शुमार होने वाली यह कंपनी अब साधारण मानी जाती है और लिस्ट में बहुत नीचे आ गई है। हम उसे वर्ल्ड प्लेटफार्म पर लाने का इरादा रखते हैं।
 
- इससे पहले फोरसाइट समूह ने भारत में कोई बड़ा अधिग्रहण नहीं किया या किसी और बड़ी गतिविधि में उसका नाम नहीं आया? 

रवि मेहरोत्रा: हां हम ऐसा ही चाहते थे। मैं दिखावे के लिए स्मारक बनाने में यकीन नहीं रखता। खामोश रहकर संपत्ति बढ़ाने में यकीन रखता हूं। सिर्फ 37 साल पुरानी हमारी कंपनी है। शुरू के तीस साल हमने चुपचाप सिर झुकाकर काम किया। लो प्रोफाइल में रहकर मजबूती बनाई। वक्त आने पर हम मैदान में हैं। 

-भविष्य की आपकी योजना में कानपुर कहां है? 

रवि मेहरोत्रा: कानपुर अतीत में, वर्तमान में और भविष्य में भी फोरसाइट समूह की रणनीति में रहेगा। रणनीति क्यों, कानपुर तो हमारे दिल में है। आज से आठ दशक पहले कानपुर शहर में ही मेरे पिता ने दो बंगले बनाए थे। वहीं पांच भाइयों और दो बहनों वाला हमारा परिवार रहता था। उन्हीं दो बंगलों में से एक में मैंने 2001 में मेरीटाइम ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट खोला। हर दूसरे-तीसरे साल मैं कानपुर जाता हूं और वहां की माटी माथे से लगाता हूं। आगरा यूनिवर्सिटी से संबद्ध एक कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाने वाले मेरे पिता की कर्मभूमि कानपुर थी और वही मेरी जन्मभूमि भी है। 

-आपकी नजर में भारत की सबसे बड़ी ताकत क्या है? 

रवि मेहरोत्रा: भारत के डीएनए में उद्यमिता है। कभी हम सोने की चिड़िया इसलिए थे क्योंकि हम श्रेष्ठ उत्पादक थे। हमारे ढाका की मलमल की तूती बोलती थी। इतिहास के एक मोड़ के बाद हम पिछड़े। लेकिन हमारा डीएनए सुरक्षित है। जापान और कोरिया जैसे मुल्कों की तरह भारत को गिरकर उठना आता है। सबसे बड़ी ताकत हमारी नौजवान आबादी है। कुछ ही बरस बाद हमारी आबादी चीन से अधिक हो जाएगी। नौजवान आबादी सपने देखती है। इन सपनों को साकार करने लायक माहौल बनाना सरकारों का ही नहीं, इंडस्ट्री का भी फर्ज है। फोरसाइट समूह भारत की भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए समाधान पेश कर रहा है और साथ ही वह हजारों-लाखों युवा-युवतियों को शानदार करिअर अवसर देने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
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