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उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति का मामला दो हफ्ते टला
ब्यूरो / अमर उजाला, नई दिल्ली-देहरादून
Updated Thu, 11 Feb 2016 03:46 PM IST
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उत्तराखंड सरकार को लोकायुक्त की नियुक्त करने का निर्देश देने संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने लोकायुक्त नियुक्त करने संबंधी अधिनियम की प्रति पेश करने के लिए कहा है।
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अदालत ने इसके लिए दो हफ्ते का समय दिया है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय के बारे में कई सवाल भी पूछे हैं। पीठ ने अभी इस मामले में कोई नोटिस नहीं जारी किया है।
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इससे पहले पीठ ने अश्विनी की ओर से पेश वकील से पूछा कि याचिकाकर्ता कौन हैं। वह क्या करते हैं। उनकी आजीविका का साधन क्या है। क्या वह उत्तराखंड के रहने वाले हैं।
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याचिका में कहा गया है कि लोकायुक्त को लेकर उत्तराखंड का अधिनियम बेहद अच्छा है और वर्ष 2011 में विधानसभा में सर्वसम्मति से इससे संबंधित विधेयक पारित हुआ था। राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति जल्दी करने की गुहार की गई है।
उत्तराखंड में 2013 से लोकायुक्त का पद रिक्त है। यहां भ्रष्टाचार संबंधी 700 से अधिक शिकायतें लंबित हैं। राज्य में लोकायुक्त के दायरे में मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्री और सरकारी नौकर हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री, विधायक और सेवानिवृत्त सरकारी नौकर भी इसके तहत आते हैं। इसमें दोषियों को उम्रकैद की सजा और संपत्ति जब्त करने का प्रावधान है।