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लोकायुक्त पर घिरे सीएम रावत, गरमाएगी उत्तराखंड की सियासत

Tue, 30 Aug 2016 03:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 30 Aug 2016 03:11 AM IST
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lokayukt issue raise again in uttarakhand.
हरीश रावत - फोटो : Self

राजभवन से लोकायुक्त की नियुक्ति का प्रस्ताव निरस्त होना कांग्रेस सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ भाजपा के हाथ सीएम हरीश रावत को घेरने का नया मुद्दा आ गया है। भाजपा जिस तरह से भ्रष्टाचार के मुद्दे पर रावत सरकार को घेर रही थी, उसे पार पाने के लिए कांग्रेस लोकायुक्त तैनात कर अगामी चुनाव में उतरने की रणनीति बना रही है।

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नियुक्ति के मामले पर राजभवन के खड़े किए सवालों से भाजपा अब न केवल नियुक्ति में देरी, बल्कि गड़बड़ी के मुद्दे पर भी तूल दे सकती है। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी का लोकायुक्त एक्ट निरस्त कर किरकिरी झेल रही कांग्रेस अगर चुनाव से पहले लोकायुक्त नियुक्त नहीं पाई तो इसका असर विधानसभा चुनाव के दौरान भी दिखेगा।
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प्रदेश में लोकायुक्त की नियुक्ति का मामला विधानसभा चुनाव 2012 से चल रहा है। चुनाव से ठीक पहले तत्कालीन सीएम बीसी खंडूड़ी ने लोकायुक्त एक्ट पास कर दिया था, जिसके लिए अन्ना हजारे ने भी उनकी पीठ थपथपाई थी। चुनाव के दौरान खंडूड़ी का लोकायुक्त एक्ट सियासी मुद्दा बना।

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खंडूड़ी का एक्ट निरस्त कर किरकिरी झेल रही है कांग्रेस

lokayukt issue raise again in uttarakhand.
हरीश रावत - फोटो : अमरउजाला

इसके बाद कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद खंडूड़ी के लोकायुक्त एक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया। भाजपा ने उस दौरान भी कांग्रेस की मंशा पर सवाल खड़े किए। खंड़ूड़ी के एक्ट पर राष्ट्रपति भवन से भी मुहर लगी, बावजूद इसके जनवरी 2014 को बहुगुणा सरकार ने सदन से नया लोकायुक्त बिल पारित करवा दिया। बिल पारित होते समय भाजपा ने सदन से वॉकआउट कर कांग्रेस की मंशा पर सवाल खड़े किए।

इसके बाद डेढ़ वर्ष तक कांग्रेस सरकार ने लोकायुक्त तैनाती का मामला लटकाए रखा। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सीएम हरीश रावत लोकायुक्त तैनात कर भाजपा के हाथ से भ्रष्टाचार का मुद्दा छिनने के प्रयास में थे। लेकिन, सर्च कमेटी के गठन को लेकर भाजपा ने जो सवाल खड़ा किया था, उसी को आधार बना राजभवन ने फाइल सरकार को लौटा दी है।

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लोकायुक्त की नियुक्ति पर फंसे पेच से भाजपा के हाथ बड़ा मुद्दा लग सकता है। रावत सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की तैनाती करने की रणनीति फिलहाल टल गई है। सीएम के पास अब लोकायुक्त की तैनाती करने के लिए सीमित समय और विकल्प हैं। वहीं भाजपा के पास अब वर्ष 2012 के खंडूड़ी सरकार के लोकायुक्त एक्ट को निरस्त करने से लेकर पांच साल में लोकायुक्त तैनात नहीं होने जैसे मुद्दों को सियासी रंग देने का मौका है।

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