फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   lokayukt bill passed in uttarakhand

भ्रष्टाचार से अब बचाएगा बहुगुणा का लोकायुक्त

Wed, 22 Jan 2014 11:36 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 22 Jan 2014 11:36 AM IST
विज्ञापन
lokayukt bill passed in uttarakhand

मंगलवार को भाजपा के विरोध को दरकिनार करते हुए कांग्रेस सरकार ने सदन में लोकायुक्त विधेयक 2014 पारित कर दिया। इसी के साथ 2011 में पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के कार्यकाल में लाया गया लोकायुक्त विधेयक भी निरस्त हो गया।

विज्ञापन


पक्ष-विपक्ष में खींचतान
लोकायुक्त विधेयक 2014 पर सदन में करीब एक घंटे तक पक्ष-विपक्ष के बीच में खींचतान रही। बाद में नेता प्रतिपक्ष सहित पूरा विपक्ष सदन से बहिर्गमन कर गया।

बना पहला राज्य
सदन के बाहर बाद में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि इसी के साथ देश में लोकसभा से पारित लोकायुक्त विधेयक को जस का तस पारित करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य बन गया है।
विज्ञापन


13 जनवरी को सरकार ने इसी लोकायुक्त विधेयक को पारित करने के लिए विशेष सत्र बुलाया था। बीच में अवकाश के कारण 20 जनवरी को ही लोकायुक्त विधेयक 2014 सदन केपटल पर रखा जा सका।
विज्ञापन
विज्ञापन


मुख्यमंत्री ने रखा विधेयक
मंगलवार को भोजनअवकाश के बाद के सत्र में नेता सदन विजय बहुगुणा ने लोकायुक्त विधेयक 2014 को सदन के पटल पर रखा। नेता सदन ने कहा कि सरकार की मंशा किसी पुराने विधेयक को खारिज करने की नहीं थी।

कांग्रेस के घोषणा पत्र में शामिल था कि लोकसभा से पारित लोकपाल विधेयक के जैसा ही लोकायुक्त विधेयक प्रदेश में पारित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सितंबर 2011 में सदन से पारित लोकायुक्त विधेयक में कई खामियां थीं। पुराने लोकायुक्त में विधानसभा के अधिकारों तक का अतिक्रमण कर दिया गया था। लोकायुक्त को अपनी तरफ से ही किसी पर कार्यवाही करने का अधिकार था।

पलट सकेंगे लोकायुक्त का फैसला
नेता सदन के मुताबिक कांग्रेस जो लोकायुक्त विधेयक लेकर आई है उसमें पांच में से चार सदस्यों की सहमति पर ही मुख्यमंत्री के खिलाफ किसी शिकायत की जांच की जा सकेगी।

सदन को अधिकार होगा कि वह लोकायुक्त के फैसलों को पलट सकें। इस लोकायुक्त विधेयक का अन्ना ने भी समर्थन किया है।

नेता प्रतिपक्ष ने किया विरोध
नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट को यह कतई मंजूर नहीं था। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार चाहती तो पुराने लोकायुक्त विधेयक में संशोधन कर सकती थी। पर इसकी जगह पुराना लोकायुक्त अधिनियम ही खत्म कर दिया गया।

विपक्ष ने किय वाकऑउट
भट्ट ने कहा कि लोकायुक्त विधयेक 2014 में सरकार ने आयोग की जांच की परिधि में सात वर्ष के मामले रखे हैं। राज्य गठन के समय से ही मामलों को इसमें शामिल किया जाना चाहिए था।


करीब एक घंटे की बहस के बाद नेता प्रतिपक्ष सहित पूरा विपक्ष सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर बाहर चला गया।

पुराना विधेयक निरस्त
इससे पहले 2011 में भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार में लाए गए लोकायुक्त विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया गया था। नए विधेयक के पारित होते ही पूर्व का लोकायुक्त विधेयक भी निरस्त हो गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed