चुनाव 2019: फोटो मतदाता पहचान पत्र होने पर भी वोट देने की गारंटी नहीं, ये है वजह
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आपके पास मतदाता फोटो पहचान पत्र है तो भी लोकसभा चुनाव में वोट डालने की कोई गारंटी नहीं है। मतदाता सूची में नाम होने पर ही आप मतदान कर पाएंगे। सिस्टम ने अपनी लापरवाही को छिपाने के लिए मतदाताओं को ही सूची में नाम न होने का जिम्मेदार ठहराया है।
लोकसभा चुनाव के लिए राज्य में कुल 77 लाख 17 हजार 126 मतदाता है। इसमें 88 हजार 600 सर्विस मतदाता हैं। निर्वाचन आयोग का दावा है कि प्रदेश के शत प्रतिशत मतदाताओं को इलेक्ट्रोल फोटो आईडी कार्ड (एपिक कार्ड) जारी किए गए हैं।
मतदाता का नाम सूची में होना जरूरी
सभी मतदाताओं की फोटो मतदाता सूची में उपलब्ध है, लेकिन किसी मतदाता के पास एपिक कार्ड है और उसका नाम मतदाता सूची में नहीं है तो वे उन्हें वोट डालने का अधिकार नहीं है। एपिक कार्ड होने के साथ मतदाता का नाम सूची में होना जरूरी है। तभी वह अपना मत डाल सकेगा।
एक तरफ निर्वाचन आयोग शत प्रतिशत मतदान करने के लिए मतदाताओं को जागरूक कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ मतदाता फोटो पहचान पत्र होने पर मत देने की गारंटी नहीं है। जब तक कि नाम मतदाता सूची में न हो।
कहां गई निकाय चुनाव में मतदाताओं के नाम कटने की जांच रिपोर्ट
प्रदेश में हुए निकाय चुनाव में सभी वार्डों से बेहिसाब मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब थे। वोट डालने के लिए मतदान केंद्र पहुंचने के बाद जब मतदाता सूची में नाम नहीं था तो उन्हें वापस लौटना पड़ा।
मतदाताओं से लेकर राजनीतिक दलों ने भी मतदाता सूची से नाम कटाने की राज्य निर्वाचन आयोग से शिकायतें की थी। इस पर आयोग ने जांच कराने की बात कही थी, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद जांच का भी कोई पता नहीं है।
हर साल मतदाता सूची का पुनर्निरीक्षण किया जाता है, जिस कारण मतदाताओं के नाम छूट जाने की संभावना रहती है। इसके लिए निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं की सुविधा के लिए 1950 टोल फ्री नंबर और वोटर हेल्प लाइन एप भी जारी किया है। इससे मतदाता सूची में नाम है या नहीं। इसकी जानकारी प्राप्त कर सकता है। निर्वाचन आयोग का प्रयास है कि कोई भी मतदाता वोट देने से वंचित न रहे।
- सौजन्या, मुख्य निर्वाचन अधिकारी