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सत्ता संग्राम 2019: इन 5 सूरमाओं ने कराई थी सभी विरोधियों की जमानत जब्त, मिले थे रिकॉर्ड मत

Thu, 28 Mar 2019 04:00 AM IST
अलका त्यागी अनिल चन्दोला/अमर उजाला, देहरादून
अनिल चन्दोला/अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 28 Mar 2019 04:00 AM IST
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Lok sabha elections 2019 uttarakhand politics interesting fact about Security deposits
कांग्रेसी नेता हरीश रावत

उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव के इतिहास में पांच सूरमा ऐसे हुए हैं, जिन्होंने अपने सभी विरोधियों की जमानत जब्त करा दी थी। अब तक हुए 16 लोकसभा चुनाव में पांच मौके ऐसे आए हैं, जब विजेता के अलावा कोई भी प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा पाया। यह सभी नतीजे उत्तराखंड राज्य अलग बनने से पहले हुए चुनावों में आए थे। टिहरी सीट पर मानवेंद्र शाह ने दो बार यह कीर्तिमान अपने नाम किया।

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1951 से 1971 तक प्रदेश में देहरादून लोकसभा सीट थी। इसमें बिजनौर और सहारनपुर जिले का काफी हिस्सा भी शामिल था। बाद में हरिद्वार लोक सभा सीट बनने पर यह सीट समाप्त हो गई। 1951 में हुए चुनाव में कांग्रेस के महावीर त्यागी ने 53.75 फीसदी वोट हासिल कर सभी विरोधियों की जमानत जब्त करवा दी थी।
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दूसरे स्थान पर रहे जनसंघ के जेआर गोयल को मात्र 13.81 फीसदी वोट मिले थे। 1957 के आम चुनाव में कांग्रेस के मानवेंद्र शाह ने टिहरी सीट पर रिकॉर्ड 78. 89 फीसदी वोट हासिल कर अन्य प्रत्याशियों की जमानत जब्त करवा दी थी।

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1971 में कांग्रेस के प्रताप सिंह ने पौड़ी संसदीय सीट पर यह करिश्मा दोहराया और 79.24 प्रतिशत वोट हासिल कर सबका बोरिया बिस्तर बांध दिया। 1984 में अल्मोड़ा सीट पर कांग्रेस के हरीश रावत ने 61.26 फीसदी वोट लेकर भाजपा के कद्दावर नेता मुरली मनोहर जोशी समेत अन्य विरोधियों की जमानत जब्त करवा दी।

1998 के आम चुनाव में टिहरी लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे मानवेंद्र शाह 51.82 फीसदी वोट लेकर एकतरफा जीत हासिल की। राजनीतिक विश्लेषक अनूप नौटियाल ने कहा कि उत्तराखंड बनने से पहले 13 और बनने के बाद तीन लोकसभा चुनाव हुए हैं। इसके अलावा कई उपचुनाव हुए हैं। लेकिन पांच बार ही प्रत्याशी एकतरफा जीत हासिल करने में कामयाब हुए हैं। 

क्या है जमानत जब्त होना
प्रत्याशी को जमानत बचाने के लिए कुल मतदान का 16.66 फीसदी (1/6 हिस्सा) वोट प्राप्त करना आवश्यक होता है। इसका मतलब है कि किसी प्रत्याशी को अगर कुल मतदान के 16.66 फीसदी (1/6 हिस्सा) वोट नहीं मिलते तो नामांकन के समय जमा की गई राशि को जब्त कर लिया जाता है। इसे ही जमानत जब्त होना कहते हैं। 

वर्ष        लोकसभा         विजेता व दल     प्राप्त मत   कुल प्रत्याशी        
1998    टिहरी        मानवेंद्र शाह (भाजपा) 51.82        09
1984    अल्मोड़ा    हरीश रावत(कांग्रेस)   61.26       08
1971   पौड़ी        प्रताप सिंह (कांग्रेस)   79.24        03
1957   टिहरी       मानवेंद्र शाह (कांग्रेस)  78. 89      03
1951   देहरादून   महावीर त्यागी (कांग्रेस) 63.75       04

* सभी आंकड़े भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से लिये हैं। 

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