लोकसभा चुनाव 2019: पांचों सीट जीतने का इम्तिहान, भाजपा ने कसी कमर, ये मुद्दे दिला सकते हैं जीत
लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भाजपा ने कमर कस ली है। पार्टी के सामने प्रदेश की पांचों लोकसभा सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है। 2014 के लोकसभा चुनाव में चली मोदी लहर में पार्टी ने पांचों सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी। उसके बाद से चुनावी जीत का सिलसिला बना हुआ है।
2017 के विधानसभा चुनाव में 70 में से 57 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज होने के बाद भाजपा थराली विधानसभा के उपचुनाव के साथ ही स्थानीय निकाय चुनाव जीत चुकी है। इस बार भी उसे मोदी के चेहरे पर ही भरोसा है। वह पुलवामा आतंकी हमले और एयर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पूरे प्रदेश में चली राष्ट्रवाद की लहर पर सवार हो चुकी है। प्रदेश में पांच में से चार सीटों पर उसका कांग्रेस से सीधा मुकाबला है। लेकिन हरिद्वार संसदीय सीट पर कांग्रेस के अलावा बसपा और सपा का गठबंधन चुनावी समीकरणों को फंसाने की क्षमता रखता है।
भाजपा के पक्ष में
केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार। पिछले दो साल से भाजपा और उसकी सरकार की नीतियां, कार्यक्रम और योजना और सांगठनिक गतिविधियां पूरी तरह से लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर केंद्रित हैं। पिछले दो वर्ष में भाजपा सरकार ने केंद्र से कृषि, उद्यान, अवस्थापना विकास, सहकारिता, आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में कई सौ करोड़ की योजनाओं को स्वीकृति दिलाई है।
पार्टी की मुख्य ताकत
मजबूत सांगठनिक नेटवर्क पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है। उसके पास पांचों सीट पर प्रत्याशी के मजबूत और जाने पहचाने चेहरे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह स्वयं बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से एक बार सीधा संवाद कर चुके हैं। चुनाव में आरएसएस का मजबूत समर्थन भी है।
उम्मीदवारों पर सस्पेंस
पांचों सीटों पर पार्टी किन चेहरों पर दांव लगाएगी, अभी इस पर पार्टी ने सस्पेंस बरकरार रखा है। हालांकि संगठन के भीतर सेटिंग-गेटिंग की चर्चा भी खूब हो रही है। सूत्रों के अनुसार पौड़ी संसदीय सीट पर मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी के उम्रदराज होने के बावजूद पार्टी उन्हें वहां से चुनाव लड़ाना चाहती है।
पार्टी में ये चर्चा भी जोरों पर है कि बदली हुई परिस्थितियों में पार्टी बाकी चारों सीट पर मौजूदा सांसदों को ही चुनाव लड़ा सकती है। संगठन में हरिद्वार में डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक, अल्मोड़ा में अजय टम्टा, नैनीताल में भगत सिंह कोश्यारी और टिहरी में मालाराज्य लक्ष्मी को मैदान में उतारने की चर्चाएं भी जोरों पर हैं।
चुनौती भी कम नहीं
भाजपा के सामने कांग्रेस ही सबसे बड़ी चुनती है। बेशक सैन्य बहुल प्रदेश में वह पूरा चुनाव राष्ट्रवाद के मुद्दे पर केंद्रित करने का प्रयास करेगी, लेकिन उसे केंद्र और प्रदेश सरकार के सत्तारोधी रुझान का सामना भी करना है। लोकसभा में सूपड़ा साफ होने और विधानसभा में 11 विधायकों की संख्या पर सिमट जाने के बावजूद कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक कम नहीं हुआ है।
पार्टी चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है। हमारा संगठन जिला मंडल शक्ति केंद्र से लेकर बूथ तक सक्रिय है। हम शांतिकाल में भी नहीं बैठते हैं। हमारे कार्यकर्ता बेहद उत्साहित हैं। हमें पूरा यकीन है कि फिर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।
- अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा