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यह हैं चुनाव ड्यूटी से बचने के टॉप बहाने
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 22 Apr 2014 04:00 PM IST
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देहरादून में लोकसभा का चुनाव कराने के लिए दस हजार से अधिक कर्मचारियों की जरूरत है।
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कर्मचारियों और शिक्षकों की ड्यूटी लगाई
इसके लिए सभी विभागों से कर्मचारियों और शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। बहुत सारे कर्मचारी और शिक्षक खुशी-खुशी लोकतंत्र के महापर्व में सहयोग देने के लिए तैयार हैं।
लेकिन कई कर्मचारी और शिक्षक चुनावी ड्यूटी से बचने के लिए तरह-तरह की बहानेबाजी कर रहे हैं। कोई बीमारी का बहाना बना रहा है तो कोई रिटायमेंट की बात कह रहा है।
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कुछ तो यह भी कह रहे हैं कि सीएम आवास और सचिवालय से फोन कराना पड़ेगा...।
सोमवार को कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी बिल्डिंग में मेडिकल बोर्ड की बैठक में इस तरह के कई मामले सामने आए। बैठक देर शाम एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रताप शाह की अध्यक्षता में हुई। इसमें कुल 100 कर्मचारियों ने अपनी समस्याएं रखीं।
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अपना-अपना तर्क
70 कर्मचारियों को मेडिकल के आधार पर चुनाव ड्यूटी से छूट देने की बात कही गई है। बैठक के बाहर मौजूद कर्मचारी एक दूसरे को चुनाव की ड्यूटी से बचने के लिए अपना-अपना तर्क देते नजर आए।
चुनावी ड्यूटी से बचने के लिए कैसे-कैसे बहाने
कलेक्ट्रेट में सोमवार को मेडिकल टेस्ट के लिए आए स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी कह रहे थे कि सितंबर में रिटायर हो रहा हूं फिर भी मेरी चुनाव में ड्यूटी लगा रहे हैं।
यह तो न्याय संगत नहीं है। इसी तरह नगर निगम के एक कर्मचारी का कहना था कि हार्ट का मरीज हूं। चुनाव ड्यूटी कैसे कर पाऊंगा? बड़ी तल्खी से दावा किया कि कुछ ही देर में बीमारी से संबंधित मेडिकल प्रमाण पत्र लेकर बेटा आने वाला है।
देखता हूं चुनाव में ड्यूटी कैसे लगाते हैं। यहां जान जा रही है और इन्हें चुनाव ड्यूटी की पड़ी है। पत्नी के साथ पहुंचे एक व्यक्ति ने बाकायदा मेडिकल सर्टिफिकेट दिखते हुए कहा कि डॉक्टर ने एक महीने का बेड रेस्ट कहा है।
ऐसे में चुनाव में ड्यूटी का तो मतलब ही नहीं बनता। इसी बीच एक ने दावा किया कि यह लोग ऐसे नहीं मानेंगे। सचिवालय से जुआड़ लगानी पड़ेगी।