मिशन 2019: इस तीसरी दुनिया में नेता नहीं पहुंचते वोट मांगने, पीछे है ये वजह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इसे तीसरी दुनिया ही कहेंगे क्योंकि देवभूमि के इस गांव में आज तक चलकर कोई सरकार नहीं पहुंची। पिथौरागढ़ स्थित नामिक गांव पहुंचने के लिए खड़ी चढ़ाई का ही सबब है कि 1952 से अब तक 124 परिवार और 407 मतदाताओं वाले नामिक गांव में सांसद तो दूर वोट मांगने के लिए कोई प्रत्याशी भी नहीं पहुंचा।
समुद्र तल से करीब 2700 मीटर की ऊंचाई में नामिक और हीरामणि ग्लेशियर की तलहटी में बसे नामिक गांव में 206 पुरुष और 201 महिला मतदाता हैं। नामिक जाने के लिए जिले के बिर्थी से 27 किमी. की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। 27 में से 18 किमी खड़ी चढ़ाई और नौ किमी की तीखी ढलान है।
2014 में नामिक के लोगों ने मुख्यमंत्री को देखा
बिर्थी से दूरी अधिक होने के कारण नामिक के लोग अधिकतर बागेश्वर जिले के गोगिना से आवागमन करते हैं। गोगिना से नामिक की दूरी सात किमी. है लेकिन यह मार्ग भी खड़ी चढ़ाई वाला है। नामिक में अब तक कोई प्रत्याशी तक वोट मांगने नहीं पहुंचा। जीतने के बाद किसी सांसद के दीदार गांव के लोगों ने नहीं किए।
2014 में नामिक के लोगों ने मुख्यमंत्री को देखा। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक हरीश धामी के साथ हेलीकॉप्टर से नामिक पहुंचे थे। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद नामिक के लिए होकरा के पास से 17 किमी सड़क मंजूर हुई। राज्य बनने के बाद डीडीहाट के विधायक विशन सिंह चुफाल ने नामिक का दौरा किया था।