फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Chamoli News ›   Lockdown in uttarakhand: Minister's Council Talk on three Ideas for badrinath kedarnath Doors Open Matter

उत्तराखंड: मंत्रिपरिषद का निर्णय, बीकेटीसी के नियमों के तहत खुलेंगे बदरी केदार धाम के कपाट, तीन विकल्पों पर हुई चर्चा

Thu, 16 Apr 2020 11:16 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 16 Apr 2020 11:16 PM IST
विज्ञापन
Lockdown in uttarakhand: Minister's Council Talk on three Ideas for badrinath kedarnath Doors Open Matter
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : फाइल फोटो

सरकार के सामने बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के कपाट खोलने को लेकर स्थिति अस्पष्ट है। मंत्रिपरिषद की बैठक में समय से कपाट खोलने को लेकर हुई चर्चा में तीन विकल्प सामने आए हैं। बदरी केदार प्रबंधन समिति (बीकेटीसी) के नियमों के तहत ही पूजन और कपाट खोले जाएंगे। बदरीनाथ के कपाट खोलने के लिए सरकार टिहरी राजपरिवार से संपर्क साध रही है।

विज्ञापन


गंगोत्री और यमनोत्री धाम के कपाट स्थानीय पुजारी ही पूजा कर खोलते हैं, लेकिन बदरीनाथ और केदारनाथ में रावल (मुख्य पुजारी) दूसरे राज्योें से आते हैं। ऐसे में उनको समय से प्रदेश में लाना सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। अगर केरल से रावल पहुंचते भी हैं तो पहले उन्हें 14 दिन क्वारंटीन करना पड़ेगा, जिससे कपाट खुलने की तिथि पर उनकी उपलब्धता पर संशय रहेगा।
विज्ञापन


ऐसे में सरकार तीन विकल्प लेकर चल रही है। इसके अलावा चारों धाम से जुड़े नौ मंदिरों के कपाट भी समय से खुलने हैं। इसमें आदिकेदार, लक्ष्मी मंदिर, नंदा देवी मंदिर, उर्वशी मंदिर, माता मूर्ति मंदिर, गणेश गुफा, व्यास गुफा, हनुमान मंदिर और भविष्य बदरी मंदिर शामिल हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

यह हैं विकल्प

- केंद्रीय गृहमंत्रालय और केरल सरकार को पत्र भेजें कि चौपहिया वाहन से रावल को उत्तराखंड आने की अनुमति दी जाए।
- कपाट खोलने के लिए रावल नहीं पहुंचते तो केदारनाथ धाम में उनके बदले स्थानीय पुजारी से पूजा अर्चना करवाई जाए।
- बदरीनाथ धाम में टिहरी राजघराने को विशेष अधिकार है कि वह कपाट खोलने की तिथि बढ़ा सकता है या फिर किसी अन्य को कपाट खोलने के लिए नामित कर सकता है।

पुराने दस्तावेजों का किया अध्ययन
सरकार ने बीकेटीसी के नियमों और दोनों धामों बदरी और केदार के पुराने दस्तावेजों का अध्ययन किया है। पिछली तीन से चार सदियों में तीन बार ऐसा हो चुका है कि रावल नहीं आने पर स्थानीय पुजारी कपाट खोलने के पूजन कार्य कर चुके हैं। मंत्रिपरिषद ने दोनों धामों के रावल समय से बुलाने के लिए केंद्र और संबंधित राज्य सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिख दिया है। बड़ी दिक्कत यह है कि रावल के उत्तराखंड पहुंचने पर उन्हें 14 दिन के लिए क्वांरीटन करना होगा। ऐसे में बदरीनाथ धाम के लिए टिहरी राजघराने से अनुरोध किया जाएगा कि वे इस मसले पर निर्णय लें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed