लॉकडाउन: अंतरराष्ट्रीय सीमा पुलों के बंद होने से नेपाल में बढ़ी महंगाई, व्यापारियों ने शुरू की कालाबाजारी
- नेपाली ग्राहकों को नेपाल की अपेक्षा भारतीय बाजारों से मिल जाता था बहुत सस्ता सामान
- गेहूं, चावल, आलू, नमक, चीनी, तेल की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई
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लॉकडाउन के बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा पुलों के बंद होने से नेपाल के दार्चुला और बैतड़ी जिलों में महंगाई बढ़ गई है। राशन और सब्जियां खरीदना आम आदमी के बस की बात नहीं रह गई है। वहीं, लॉकडाउन का फायदा उठाकर कई व्यापारियों ने सामानों की कालाबाजारी भी शुरू कर दी है। इससे जनता की मुसीबत और बढ़ गई है।
नेपाल के प्रदेश नंबर सात के दार्चुला और बैतड़ी जिलों को राशन और सब्जियों की सप्लाई झूलाघाट, जौलजीबी, दार्चुला और बलुवाकोट नाकों से होती है। बैतड़ी जिले के जूलाघाट, बाराकोट, धौल्याली, बुढ्ढा, सेरा, नगतड़ी, त्रिपुरा सुंदरी आदि दर्जनों गांवों के लोग रोजमर्रा के सामान की खरीदारी के लिए झूलाघाट आते थे।
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ग्राहकों को नेपाल की अपेक्षा भारतीय बाजारों से बहुत सस्ता सामान मिल जाता है। इसकी वजह से भारत की दुकानों में खूब बिक्री होती है। 22 मार्च से दोनों देशों में लॉकडाउन होने से सीमावर्ती सभी झूलापुल बंद हैं।
200 किमी दूर से नेपाल में हो रही सामान की आपूर्ति
इसके चलते नेपाल के बाजारों में सामान 200 किमी दूर धनगड़ी की मंडी से आ रहा है। लॉकडाउन का फायदा उठाकर नेपाल में कई व्यापारियों ने सामान की कालाबाजारी करनी शुरू कर दी है।
यहां के पुरचूड़ी, जोशीबुंगा, गोकूलेश्वर सहित दूरस्थ के गांवों में सामान बहुत महंगा मिल रहा है। बैतड़ी के पुरचूड़ी में चीनी 53 रुपये प्रति किग्रा भारतीय मुद्रा में, पैकेट वाला नमक और आटा 62 रुपये, जबकि 12 रुपये में मिलने वाली बीड़ी 37 में मिल रही है।
जोशीबुंगा में मोटा चावल 31 रुपये और दाले 218 रुपये प्रति किलो बिक रही हैं। चीनी 62 और गुड़ 93 किग्रा। गोकुलेश्वर में तंबाकू, गुटका, बीड़ी किसी भी कीमत पर नहीं मिल रहा है। चीनी भारत की अपेक्षा 15 प्रति किलोग्राम महंगी मिल रही है। गेहूं, चावल, आलू, नमक, चीनी, तेल की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।