फर्जी दस्तावेजों से छह कारों पर 32 लाख का लोन लेकर हड़पा
- अदालत के आदेश पर छह मुकदमे दर्ज, 12 लोगों को बनाया आरोपी
- 2012 में हुआ था फर्जीवाड़ा, जांच के बाद बैंक के अधिवक्ता ने कराई रिपोर्ट दर्ज
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फर्जी दस्तावेज के आधार पर छह कारों पर लिया गया करीब 32 लाख का ऋण हड़पने के मामले में बसंत विहार थाने में छह मुकदमे पंजीकृत कराए गए हैं। इन मुकदमों में 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर मामले दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
पुलिस अधीक्षक नगर श्वेता चौबे ने बताया कि कार पर लोन के नाम पर यह फर्जीवाडा 2012 का है। जीएमएस रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा से विभिन्न तिथियों पर छह कारों पर ऋण स्वीकृत कराया गया था। ऋण अलग-अलग नामों से लिया गया था।
ऋण की किश्त का भुगतान न होने की स्थिति में बैंक ने जांच पड़ताल की तो इसका खुलासा हुआ। आरोपियों ने शुभ प्रीमियर धर्मपुर से फर्जी कुटेशन तैयार कराकर आवेदन में फर्जी दस्तावेज लगाए थे। इन कारों पर करीब 31 लाख 95,175 रुपये का ऋण हड़पा गया था।
इस मामले में बैंक के अधिवक्ता विजय भूषण पांडेय की तरफ से अदालत में प्रार्थना पत्र दिया गया था। अदालत ने सुनवाई के बाद संबंधित के खिलाफ मुकदमे दर्ज कार्रवाई के आवेदन दिए थे। एसपी सिटी चौबे ने बताया कि अधिवक्ता विजय भूषण पांडेय की तरफ से वसंत विहार थाने में अलग-अलग छह मुकदमे दर्ज हुए हैं। विवेचना में आने वाले तथ्यों के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। एसओ नत्थीलाल उनियाल की अगुवाई में अलग से टीम गठित की जा रही है।
पहले मुकदमे में आरोपी
- शूरवीर सिंह तोमर निवासी डॉक्टर गंज, विकासनगर
- सुशील कुमार शर्मा विकासनगर
दूसरे मुकदमे में आरोपी
- रंजीत बडथ्वाल निवासी शिव विहार पटेलनगर
- धर्मपाल निवासी न्यू फॉरेस्ट कॉलोनी एफ आरआई
तीसरे मुकदमे में आरोपी
- दीपक सिंघल निवासी पटेलनगर
-नवीन गर्ग निवासी कौलागढ़
चौथे मुकदमे में आरोपी
- कृपाल सिंह निवासी अजबपुर
- शूरवीर सिंह तोमर निवासी मंझगांव चकराता।
पांचवें मुकदमे में आरोपी
- सपना चौहान पत्नी सुंदरलाल निवासी नेहरू कॉलोनी
- संजीव गुप्ता निवासी नेगी रोड, डालनवाला
छठे मुकदमे में आरोपी
- रमेश बछेती निवासी डोभालवाला
- अनिल कुमार चंदोला निवासी सारथी विहार
लंबे समय से सक्रिय है गैंग
राजधानी में कारों पर फर्जी दस्तावेज से ऋण लेने के नाम पर लंबे समय से गैंग सक्रिय है। वर्ष 2016 में तत्कालीन एसएसपी सदानंद दाते ने सबसे पहले कार लोन के नाम पर बैंकाें को करोड़ों की चपत वाले गैंग का खुलासा किया था, जिसमें 13 के करीब लोग जेल गए थे। उस समय खुलासा हुआ था कि बैंकों के सत्यापन में बरती गई लापरवाही से यह फर्जीवाडा हुआ था।