फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Liver becoming fatty due to irregular routine, obesity and type-2 diabetes

Dehradun News: अनियमित दिनचर्या, मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज से लिवर हो रहा फैटी

Fri, 19 Apr 2024 04:27 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 19 Apr 2024 04:27 AM IST
विज्ञापन
Liver becoming fatty due to irregular routine, obesity and type-2 diabetes
विश्व लिवर दिवस पर विशेष :
विज्ञापन

देहरादून। अनियमित दिनचर्या, गलत खानपान, मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज से लोगों का लिवर फैटी हो रहा है। शारीरिक गतिविधियोें की कमी और शराब का अधिक सेवन भी लिवर खराब होने का सबसे बड़ा कारण है। हालांकि, शुरुआती अवस्था में दवाओं के बिना भी फैटी लिवर ठीक हो सकता है।

दून मेडिकल कॉलेज, अस्पताल के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकुर पांडेय ने बताया कि फैटी लिवर दो तरह का होता है। एक नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर और दूसरा अल्कोहलिक फैटी लिवर। कुछ लोग शराब का सेवन नहीं करते, लेकिन इन्हें मोटापा, डायबिटीज, अनियमित दिनचर्या-खानपान आदि की वजह से लिवर फैटी हो जाता है। डॉ. अंकुर ने बताया कि लिवर खराब होने पर लिवर सिकुड़ने लगता है। ऐसे में खाना पचाना मुश्किल हो जाता है। लिवर का काम खाना पचाने के साथ ही दवाओं को भी पचाना होता है। जब लिवर फैटी हो जाता है तो दवाओं को पचाना भी मुश्किल होता है।
विज्ञापन


-----
हेपेटाइटिस-सी से लिवर कैंसर का खतरा
दून अस्पताल की इमरजेंसी मेडिसिन के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं इंचार्ज डॉ. एनएस बिष्ट ने बताया कि हेपेटाइटिस-बी और सी में लिवर खराब होने का खतरा होता है। हेपेटाइटिस बी में लिवर खराब होता है, जबकि हेपेटाइटिस सी में लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। हेपेटाइटिस सी होने के बाद ठीक भी हो जाता है, लेकिन हेपेटाइटिस बी की दवा जिंदगी भर खानी पड़ती है। ऐसे में समय पर इलाज जरूरी है। हेपेटाइटिस की समस्या सेक्सुअल ट्रांसमिशन से, उपयोग की हुई सिरिंज के इस्तेमाल और मां से बच्चे को हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


----
फैटी लिवर ग्रेड वन का इलाज संभव
डॉ. अंकुर पांडेय ने बताया कि फैटी लिवर में भी ग्रेड वन, टू और थ्री स्टेज होती हैं। ग्रेड वन में इलाज और खानपान का बेहतर ध्यान रखने पर ठीक होने की संभावना होती है। इसमें सुबह शाम वॉक, वसायुक्त खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना, शराब का सेवन बंद कर देने पर व्यक्ति ठीक हो जाता है। हालांकि, ग्रेड टू और थ्री में फैटी लिवर शरीर के लिए घातक हो जाता है। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति की जीवन शैली संतुलित नहीं है तो उसे मेटाबॉलिक सिंड्रोम हो सकता है। इसमें शरीर का वजन बढ़ना, ब्लड प्रेशर बढ़ना, लिवर फैटी होना, टाइप-2 डायबिटीज होना शामिल होता है।

---
आखिर में पड़ती है दवा की जरूरत
डॉ. अंकुर ने बताया कि लिवर की समस्या से बचाव के लिए इलाज के तीन चरण हैं। पहला चरण जीवन शैली बेहतर रखना, दूसरा खानपान बेहतर रखें और तीसरा दवा खाएं। अगर जीवन शैली और खानपान बेहतर रखें तो दवा की जरूरत ही नहीं पड़ती।

---

इन बातों का रखें ध्यान

- डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं न लें।
- सुबह और शाम के समय वॉक करें।
- नियमित खानपान और शारीरिक गतिविधि जारी रखें।
- खानपान में तला भुना कम खाएं और जंकफूड का सेवन न करें।
- हेपेटाइटिस से बचाव के लिए इलाज जरूर करवाएं।
------
यह होती है दिक्कत
- भूख कम लगना।
- खाना न पचना।
- उल्टी होना, जी मिचलाना।
- व्यक्ति का वजन घटना।
- पीलिया होना आदि।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed