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जिलों से छन कर निकलेगा भाजपा में दायित्वों का ‘अमृत’
विपिन बनियाल/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 31 Jul 2017 11:31 AM IST
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट
- फोटो : अमरउजाला
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चार महीने गुजर गए। बीजेपी कार्यकर्ता दायित्वों की तलाश में है। सरकार के हाथ टाइट हैं। इन स्थितियों के बीच, बीजेपी नेतृत्व ने दायित्वों के लिए सुयोग्य दावेदारों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। जो व्यवस्था बनाई गई है, उसमें जिलों से छनकर ही दायित्व का ‘अमृत’ निकलेगा।
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जिलों की कोर कमेटी से 10-10 सुयोग्य दावेदारों के नाम प्रदेश मुख्यालय तक पहुंच गए हैं। नए सांगठनिक जिले देवप्रयाग से दावेदारों का नाम आना बाकी है। उपराष्ट्रपति के चुनाव के बाद बीजेपी मुख्यालय से सरकार को ये नाम रैफर किए जाएंगे। जिलों से आने वाले कुछ सुयोग्य दावेदारों का इस्तेमाल बीजेपी सरकार की जगह संगठन में भी कर सकती है।
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प्रचंड बहुमत की बीजेपी सरकार दायित्वों पर फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ा रही है। पार्टी के रणनीतिकारों की नसीहत इस मामले में जल्दबाजी नहीं दिखाने की है। इसके विपरीत, पार्टी के कार्यकर्ता ज्यादा दिन दायित्व से दूर रहने को तैयार नहीं है। सीएम कार्यालय में जिस तरह से कई दायित्व बंटे हैं, उससे उनकी बेचैनी और बढ़ गई है।
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बीजेपी नेतृत्व ने इन सारी स्थितियों को देखते हुए जिलों से आए सुयोग्य दावेदारों के नाम सूचीबद्घ करना शुरू कर दिया है। लगभग सभी जिलों से 10-10 सुयोग्य दावेदारों के नाम प्रदेश मुख्यालय पहुंच गए हैं। प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने इसकी पुष्टि की है।
इनसे बनी है जिलों की कोर कमेटी
बीजेपी की 22 सांगठनिक जिलों में कोर कमेटी बन चुकी हैं। देवप्रयाग में जल्द ही इसका गठन होना है। जिला कोर कमेटी में अध्यक्ष, पूर्व अध्यक्ष, जिला प्रभारी, सभी महामंत्री, सांसद, विधायक के अलावा एक प्रदेश पदाधिकारी शामिल किया गया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के मुताबिक देवप्रयाग जिले में जल्द ही अध्यक्ष और कोर कमेटी के अध्यक्ष की नियुक्ति की जा रही है।
संगठन में भी हो सकता है उपयोग
बीजेपी के ज्यादातर कार्यकर्ताओं की इच्छा सरकार में एडजस्टमेंट की है, लेकिन पार्टी नेतृत्व अपने हिसाब से भी कई चीजों को देख रहा है। ये भी संभव है कि सूचीबद्घ किए गए कार्यकर्ताओं में से कुछ को संगठन में एडजस्ट किया जाए। जिला कोर कमेटी से न सिर्फ नाम भेजे गए हैं, बल्कि ये भी इशारा किया गया है कि कौन से पद के लिए कौन सा कार्यकर्ता उपयुक्त साबित हो सकता है।
जिलों की स्थिति देख बंटेंगे दायित्व
भले ही हर जिले से 10-10 नाम मांगे गए हैं, लेकिन दायित्व बंटवारे में किस जिले के कितने लोग एडजस्ट होंगे ये तय नहीं है। संबंधित जिले की स्थिति देखकर भी निर्णय लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, पौड़ी जैसे जिले, जहां से तीन-तीन मंत्री सरकार में हैं, वहां से कम लोगों का एडजस्टमेंट हो सकता है।
हमें जिलों से सूची प्राप्त हो गई है। हालांकि ये भी तय है कि उपराष्ट्रपति के चुनाव के बाद ही कंपाइल सूची सरकार को भेजी जाएगी। जिलों से नाम मंगवाने का ये उद्देश्य है कि सरकार के अलावा संगठन के लिए भी हम सुयोग्य कार्यकर्ताओं को चिह्नित कर सकें।
- अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, बीजेपी