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FRI में गुलदार का आतंक, लगा 'कर्फ्यू'
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 12 Dec 2014 12:04 PM IST
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दिनभर टूरिस्ट की चहल कदमी से गुलजार रहने वाला ऐतिहासिक एफआरआई इन दिनों गुलदार की सक्रियता सुनसान पड़ा है। गुलदार ने एफआरआई में ऐसी दहशत फैलाई कि यहां अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात बन गए हैं।
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लोग घरों में दुबकने के लिए मजबूर
न केवल सुबह-शाम बल्कि दिन में भी यहां रह रहे लोग घरों में दुबकने के लिए मजबूर हैं। गुरुवार शाम को भी कोठी नंबर 36 के पास गुलदार के दो शावक नजर आने से लोगों की दहशत और बढ़ गई। एफआरआई परिसर में पिछले कई दिनों से गुलदार का आतंक बना हुआ है।
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एफआरआई के हॉस्टल के पास से कुत्ते और कोठी नंबर दस के पास से बंदर को शिकार बनाने वाला गुलदार यहां एक 15 वर्षीय बच्चे रवि पर भी जानलेवा हमला कर चुका है। गुलदार के कारण परिसर में रह रहे लोग तो दहशत में हैं ही मीडिया में खबरें आने के बाद बाहर से आने वाले लोग भी अब कतरा रहे हैं।
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यही कारण है कि अब न तो यहां सुबह की सैर करने वाले नजर आते हैं और न ही पर्यटकों की चहल-पहल। शाम होते ही जैसे यहां नो एंट्री जैसे हालात हो जाते हैं। अधिकारियों के आवासों से जुड़े नौकर अपने घरों में कैद हो जाते हैं।
बृहस्पतिवार शाम करीब 7:40 बजे अचानक एफआरआई परिसर ट्रेवर रोड स्थित कोठी नंबर 36 के पास गुलदार के शावक होने की खबर कंट्रोल रूम को मिली।
पेट्रोलिंग हेड चंद्रदेव सिंह मौके पर अपनी टीम के साथ पहुंचे। उन्होंने बताया कि दोनों शावक को भगाया गया लेकिन वो अंधेरे में आसपास ही दुबक गए। उन्होंने बताया कि दो दिन से वन विभाग की टीम यहां पेट्रोलिंग करने नहीं आई।
आवासों से जुड़े क्षेत्रों में की जाएगी तारबाड़
गुलदार के आतंक के कारण बिगड़े हालात को देखते हुए गुरुवार को आईसीएफआरई के महानिदेशक अश्विनी कुमार ने एक बैठक बुलाई। बैठक में मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक डीवीएस खाती, डीएफओ सुशांत पटनायक, एफआरआई निदेशक डॉ. पीपी भोजवैद सहित कई आला अधिकारी शामिल हुए।
तय किया गया कि एफआरआई के आवासीय परिसरों से जुड़े जंगली क्षेत्रों में तारबाड़ की जाएगी। इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों में प्रकाश की व्यवस्था की जाएगी। डीएफओ सुशांत पटनायक ने बताया कि वन विभाग गुलदार को पकड़ने के लिए यहां कुछ और कैमरा ट्रैप लगाने के साथ ही पिंजरे भी बढ़ाएगा।
बैठक में यह भी तय हुआ कि एफआरआई परिसर में आने वाले हर शख्स को पंफ्लेट, पोस्टर आदि से गुलदार के प्रति जागरूक किया जाएगा। परिसर में ऐसे होर्डिंग भी लगाए जाएंगे, ताकि गुलदार से लोग सचेत रहें। वन विभाग ने गुलदार को पकड़ने में एफआरआई के कर्मचारियों की भी सहायता मांगी है।
एक से ज्यादा है संख्या
एफआरआई में गुलदार की संख्या एक से ज्यादा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कई बार दो गुलदार एक साथ नजर आए हैं। गुरुवार की शाम को भी गुलदार के दो शावक नजर आए थे।
रात को पिंजरे में रखा जाता है कुत्ता
वन विभाग की ओर से शाम ढलने के बाद पिंजरे में एक कुत्ता रखा जाता है। सुबह सूरज उगते ही पिंजरे से कुत्ते को निकाल लिया जाता हैं। कुत्ता गुलदार के पसंदीदा भोजन में आता है लेकिन गुलदार अब तक पिंजरे के आसपास नहीं आया है।
गुलदार के हमले का शिकार जूझ रहा मुश्किलों से
एफआरआई में चार दिसंबर को गुलदार के जानलेवा हमले का शिकार हुआ रवि अब मुश्किलों से जूझ रहा है। रवि के गरीब परिवार के पास पैसे की बेहद कमी है लेकिन हर दिन पांच हजार रुपए का इंजेक्शन लग रहा है। वन विभाग भी अभी तक कागज पूरे न होने की वजह से मुआवजा नहीं दे पाया है।
रवि पर चार दिसंबर की शाम को उस वक्त गुलदार ने हमला कर दिया था, जब वह कैंटीन से सामान खरीदकर लौट रहा था। गुलदार के हमले में रवि के सिर, बांहों और पैरों में गहरी चोट आई थी। तब से रवि महंत इंदिरेश अस्पताल में भर्ती है। परिजनों के लिए यह बेहद मुसीबतों वाला वक्त है।
परिजनों ने बताया कि अब तक वन विभाग से भी कोई मुआवजा नहीं मिला है। डीएफओ सुशांत पटनायक का कहना है कि अभी कागज पूरे नहीं आए हैं, इसलिए मुआवजा नहीं दिया गया है। जैसे ही कागजात पूरे होंगे तो रवि के परिवार को मुआवजा दे दिया जाएगा।