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हिमालयी वनों का सबसे बड़ा हमलावर है गुलदार
रजा शास्त्री / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 03 Mar 2017 12:54 PM IST
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मध्य हिमालयी क्षेत्र उत्तराखंड के वनों का सबसे बड़ा हमलावर गुलदार है। खौफ, भूख और बेघरी के आक्रोश से भरे इस वन्य जीव ने पांच सालों में प्रदेश में सबसे अधिक जानें लीं और लोगों को घायल किया।
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मानव और गुलदार संघर्ष को घटाने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने प्रदेश के लिए पांच साल पहले कार्ययोजना बनाकर दी थी, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया जा सका।
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भारतीय वन्य जीव संस्थान ने उत्तराखंड के वन्य जीवों के संबंध में कई बार चेताया है। पुश्तैनी कॉरीडोर और फूड चेन टूटने से सबसे बुरा असर गुलदार पर पड़ रहा है। शोधों में पाया गया कि वनों में मानव के बढ़ते हस्तक्षेप के कारण गुलदार के वासस्थल खत्म हो रहे हैं।
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बेघर होकर दूसरे क्षेत्रों में घूम रहे गुलदार मारे जाने के खौफ में और आक्रामक हो गए हैं। वासस्थल टूटने के साथ ही गुलदार का भोजन कम हो रहा है। घास के इलाके कम होने के कारण गुलदार का भोजन बनने वाले हिरन, चीतल, खरगोश आदि कम हो गए हैं। वन विशेषज्ञों का कहना है कि गुलदार का प्रिय भोज्य हिरन है। बाघ और गुलदार के साथ लोग भी हिरन का शिकार करके खा रहे हैं जिससे यह वन्य जीव कम हो गया है।
शोधों में बताया गया कि खौफ, भूख और बेघरी से गुलदार आक्रामक हो गया। प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ी है, इससे भी गुलदार दिक्कत में आया है। बाघ के वासस्थल से गुलदार कम से कम तीन किमी दूर रहता है। भारतीय वन्य जीव संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. कमर कुरैशी का कहना है कि परिस्थितियों के लिहाज से एनटीसीए की कार्ययोजना अपडेट होती है। इसे लागू करके मानव-वन्य जीव संघर्ष न्यूनतम किया जा सकता है।
जंगल घट रहा है। बाघ, गुलदार की संख्या बढ़ रही है। हिरनों की संख्या घटने से मांसाहारी वन्य जीवों को खुराक नहीं मिल पा रही। इसी से गुलदार इंसानों पर हमला करने लगते हैं। वैसे ये वन्य जीव मानव से डरते हैं, लेकिन लोग जब उनके रास्ते में आ जाते हैं तो वे हमला कर देते हैं। इसके अलावा लोग वन्य जीवों के साथ रहना भूल गए हैं। अगर एहतियात बरता जाए तो रिस्क न्यूनतम हो जाएगा।
- डॉ. वाईवी झाला, नोडल अधिकारी, टाइगर सेल, भारतीय वन्य जीव संस्थान
गुलदार के हमलों का आंकड़ा
वर्ष 2011-12: मौत-शून्य, घायल-20
वर्ष 2013-14: मौत-14, घायल-15
वर्ष 2014-15: मौत-16, घायल-70
वर्ष 2015-16: मौत-15, घायल-44
मुआवजा दिया गया-3 करोड़, 87 लाख, 39 हजार
-पांच सालों में बाघ के हमले में 9, हाथी के 34, सूअर केे 9, भालू के 9 और गुलदार के हमले में 45 लोग मरे हैं।
-पांच सालों में बाघ के हमले से 30, हाथी के 43, सूअर के 188 और गुलदार के हमले से 232 लोग घायल हुए हैं।
-मृतकों और घायलों को कुल मुआवजा दिया गया-1 करोड़, 66 लाख, 36 हजार।
-वर्ष 2016-17 में जनवरी तक मानव-वन्य जीव संघर्ष में 18 व्यक्ति मारे गए और 423 घायल हुए।