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विधायकों ने यशपाल को बनाया 'टारगेट'

Tue, 20 Aug 2013 09:24 AM IST
देहरादून/शेषमणि शुक्ल
देहरादून/शेषमणि शुक्ल Updated Tue, 20 Aug 2013 09:24 AM IST
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Legislators are targeted at meeting the Minister of Disaster Management

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की ओर से बुलाई गई बैठक में आपदा प्रबंधन एवं सिंचाई मंत्री यशपाल आर्य ही पूरे दिन विधायकों के निशाने पर रहे।

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दैवी आपदा से हुई बर्बादी की तस्वीर दिखाते हुए विधायकों ने पिछले वर्ष आपदा मद के धन का भी हिसाब मांगा। वहीं पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी को भी विधायकों ने बैठक में जमकर कोसा।
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बसपा और यूकेडी के भी विधायक शामिल
सूत्रों के मुताबिक बैठक में कांग्रेस के साथ ही बसपा और यूकेडी के भी विधायक शामिल हुए। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ही प्रोटोकाल के चलते इस बैठक में नहीं पहुंचे।
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बाकी कांग्रेस समेत सरकार के सभी सहयोगी दलों के विधायकों ने बैठक में शामिल होकर अपने क्षेत्र की बात रखी। सभी ने लगभग एक जैसी ही समस्या का जिक्र करते हुए आपदा प्रभावितों के मुआवजे और मदद राशि तत्काल मुहैया कराने तथा क्षतिग्रस्त सड़कों को ठीक करने की बात बैठक में कही।

विधायकों ने जताई नाराजगी
हालांकि कुछ विधायकों ने इस बात पर नाराजगी भी जताई कि पिछले साल के आपदा मद में प्रस्तावित कार्य समय से नहीं हुए। जिसके चलते इस बार और ज्यादा बर्बादी हुई।


उत्तरकाशी की बर्बादी का मसला आपदा प्रबंधन सलाहकार नवप्रभात ने उठाया। उत्तरकाशी का भ्रमण कर हाल ही में नवप्रभात लौटे हैं।

उठा दीवार का मुद्दा
उन्होंने कहा कि अगर नदी की सुरक्षा दीवार समय से बन गई होती तो उत्तरकाशी को बर्बादी से बचाया जा सकता था। इसी तरह की बात हेमेश खर्कवाल ने कही।

मुख्यमंत्री की घोषणा का हिस्सा शारदा नदी का तटबंध नहीं बनने से ३५ से ज्यादा मकान नदी की भेंट चढ़ गए। लोग बेघर और बर्बाद हो गए।

पेयजल मंत्री रहे निशाने पर
पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी को भी विधायकों ने आड़े हाथ लिया। पेयजल योजनाओं में काम की गति बेहद धीमी होने के कारण विधायकों को अपने क्षेत्रों में लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है।

सुबह करीब ११ बजे से शुरू हुई मैराथन बैठक अपराह्न करीब ४ बजे तक चली। मुख्यमंत्री ने बड़े सब्र से हर विधायक की बात सुनी और उनके सुझाव भी लिए।

मुआवजे की रकम बढ़ाओ
कुछ विधायकों की ओर से विभिन्न मदों में मुआवजे की रकम बहुत कम होने की बात कही गई और उसे बढ़ाने की भी मांग की गई।

खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि भूमि बह जाने पर उसके एवज में अभी केवल २५०० रुपये प्रति नाली मुआवजा दिया जा रहा है। विधायकों ने इसे बढ़ा कर १० हजार रुपये प्रति नाली करने की मांग की है।

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