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चार किमी में बदला चार कदम का रास्ता!
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 21 Sep 2013 11:16 AM IST
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राजधानी में विधानसभा सत्र के दौरान चिलचिलाती धूप में लोग तिलमिलाते हुए नजर आए। सत्र के दौरान रातों-रात बैरिकेडिंग लगाकर चार कदम के रास्ते को चार किमी में बदल दिया जाए तो किसी का भी तिलमिलाना स्वाभाविक था।
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विधानसभा सत्र के चलते रिस्पना पुल पर बने बैरियर पर शुक्रवार को जब पुलिसकर्मियों ने एक महिला को रोका और दूसरे रास्ते से जाने के लिए कहा तो महिला के दर्द शब्द बनकर जुबां पर आ गए।
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वह चली तो गई लेकिन पुलिस से पूछती गई कि नेताओं की सुरक्षा के लिए इतना तामझाम और हम लोगों के लिए क्या? दिल तो करता है कि...महिला के आगे के शब्द सुनाई नहीं दिए।
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शुक्रवार को विधानसभा सत्र के आखिरी दिन सुबह 11 बजे बैरियर से पहले रूट डायवर्जन पर सीओ मसूरी जया बलोनी को पुलिस बल के साथ तैनात किया गया था। सीओ और पुलिसकर्मी बैरियर पर रिस्पना की तरफ से आने वाले लोगों को बता रहे थे कि रूट ब्लॉक कर दिया गया है।
इसी समय एक महिला सात साल के बच्चे के साथ पहुंची। उसने पुलिस वालों से कहा कि अभी तो रास्ता खुला था। इतनी जल्दी कैसे रूट बदल दिया गया? पुलिस ने मजबूरी बताई तो महिला ने कहा कि उसका दूसरा बच्चा घर पर अकेला है। दूसरे रास्ते से उसके घर की दूरी चार किमी बढ़ जाएगी। मेरे साथ बच्चा भी है।
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ऐसे में इतनी दूर पैदल कैसे चल सकती हूं? वह भी इतनी धूप में। पुलिस महिला की परेशानी पर ध्यान न देकर उसे अपनी मजबूरी बताती रही। जब पुलिस ने महिला को जाने नहीं दिया तो वह भड़क गई और गुस्से में कहा कि इन नेताओं को तो देश से निकाल देना चाहिए। इनकी सुरक्षा के लिए आम आदमी को परेशानी ही परेशानी दे दी जाती है।
महिला गई ही थी एक बुजुर्ग आ गए। उन्हें रास्ता ब्लॉक होने की बात बताई गई तो भड़क गए। नेताओं के साथ ही पुलिस को भी काफी खरीखोटी सुनाई। इसी तरह दिन भर बहुत सारे लोग नेताओं और पुलिस वालों पर भड़कते रहे। कुछ भी कहकर भड़ास निकालते रहे।
इसी बीच एक दारोगा ने दूसरे से पूछा कि यार क्या हम दिन भर गाली ही खाते रहेंगे। लोगों की परेशानी पर सीओ मसूरी जया बलोनी कहती हैं कि हमें पता है कि आम लोगों को मुश्किल होती है, लेकिन विधानसभा सत्र के दौरान यह करना हमारी मजबूरी हो जाती है।
इतना कष्ट की हम रूठ जाएं
घर लौट रही भागरथी देवी ने बताया बहुत परेशान हो गए हैं हम लोग। यहां जनता की पूछ नहीं है। इस गर्मी में धर्मपुर से बैरियर तक पैदल चलना और अब यह पुलिसकर्मी बता रहें है कि यहां से चार किमी और पैदल चलना है।
सुरेश ने कहा कि रूट डायवर्जन प्लान लागू होते ही बसें और विक्रमों के रूट बदल जाते हैं। ऐसे में पूरे शहर से हम कट जाते हैं। बहुत मुश्किल होती है।
खुशहाल सिंह बताते हैं कि कई किमी पैदल चलकर यहां तक पहुंचा हूं। अब यहां पर रास्ता ब्लॉक कर दिया गया है। आगे चलने की हिम्मत नहीं है। अनुज नेगी ने बताया यह हर बार का ड्रामा है। बहुत परेशान कर दिया इन लोगों ने हम लोगों को। हमारी कोई पूछ नहीं है।
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