हाईकोर्ट: निजी स्कूल और सरकार पर हाइकोर्ट सख्त, कहा- स्कूल बंद मिले तो कानूनी कार्रवाई होगी
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राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद (एनसीईआरटी) की किताबों के मामले में उच्च न्यायालय ने निजी स्कूलों और प्रदेश सरकार के खिलाफ सख्य रवैया अख्तियार कर लिया है। न्यायालय ने स्कूलों से साफ कहा कि बुधवार चार अप्रैल को कोई स्कूल बंद मिला तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश सरकार से भी न्यायालय ने कई सवाल पूछे हैं और मुख्य सचिव को विस्तार से जवाब देने को कहा है। नॉलेज वर्ल्ड माजरा (देहरादून) और सात अन्य की इन याचिकाओं पर अब सुनवाई 11 अप्रैल को होगी।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने सरकार से पूछा कि प्रदेश में पढ़ने वाले सभी बच्चों के लिए क्या वर्तमान में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद की किताबें उपलब्ध हैं। क्या शिक्षकों को इन किताबों से पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया गया है।
न्यायालय ने यह भी पूछा है कि सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों में किताबें लगाने में मतभेद क्यों हो रहा है। प्रदेश सरकार ने केवल सीबीएसई से संचालित स्कूलों में ही इन किताबों को लगाने का आदेश जारी किया था।
इस संबंध में दायर याचिका में कहा गया कि सरकार ने 23 अगस्त 2017 को एक शासनादेश जारी कर निजी स्कूलों (आइसीएसई को छोड़कर) में एनसीआरटीई की ही किताबें लागू करने का शासनादेश जारी किया था और निजी प्रकाशक की किताबों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया।
सरकार ने इसका मुख्य कारण निजी विद्यालयों में निजी प्रकाशकों की ही किताबें महंगे दामों पर बेचने और इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त भार पड़ने की बात कही थी। याचिका के जरिये सरकार के इसी आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त करने की मांग की गई। स्कूलों की हड़ताल को लेकर एक अन्य याचिकाएं भी इस समय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और इस याचिका पर सुनवाई बुधवार को होनी है।