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कैश में चंदा नहीं, चेक से नेता जी हैं परेशान
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 25 Jan 2017 11:00 AM IST
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नोटबंदी, बैंक, करेंसी एक्सचेंज
- फोटो : self
नोटबंदी का असर चुनाव में उतर रहे प्रत्याशियों पर दिखने लगा है। नामांकन भरने से पहले प्रत्याशी जहां लाखों का चंदा कैश में जुटा लेते थे, इस बार उनके समर्थक चेक लेकर आ रहे हैं। कैश की कमी से पस्त तमाम प्रत्याशी चंदे में चेक देखकर माथा पीट रहे हैं। चुनाव में 28 लाख की तय सीमा से कहीं अधिक होने वाले खर्च को कैसे जुटाया जाए, इसके लिए अब उनके एकाउंटेंट माथापच्ची कर रहे हैं।
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विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुई नोटबंदी अब सभी दलों पर दिखने लगी है। अमूमन चुनाव में उतरने वाले अधिकांश प्रत्याशियों के पास फाइनेंसर होते हैं। माना जाता है कि फाइनेंसर अपने बिजनेस संबंधी भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर चुनाव में पैसा लगाते हैं। इसके अलावा हर विधानसभा में दावेदारों के समर्थक भी होते हैं, जो हजारों से लेकर लाखों में चंदा देते हैं।
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इस बार प्रत्याशियों पर दोनों तरह से मिलने वाली आर्थिक मदद में भारी कमी आई है। एक प्रत्याशी ने बताया कि वर्ष 2012 विधानसभा चुनाव में उनके पास नामांकन भरने के दिन समर्थकों ने लाखों रुपये मदद के तौर पर दिए। इस बार भी लोग मदद के लिए तो आए लेकिन वह चेक दे रहे थे। यह हाल अधिकांश प्रत्याशियों का है, जिनको समर्थकों की ओर से मिलने वाली अच्छी खासी मदद इस बार नोटबंदी की भेंट चढ़ गई है। हालांकि प्रत्याशी अब इसके लिए दूसरे विकल्प ढूंढ रहे हैं।
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कैश रखना और भेजना बना मुसीबत
प्रत्याशियों के लिए कैश रखना बड़ी मुसीबत बन गया है तो उनके समर्थकों को उन तक कैश पहुंचाना बड़ी चुनौती है। नोटबंदी के बाद से सुरक्षा एजेंसियों के अलावा इन्कम टैक्स महकमे की सक्रियता के चलते प्रत्याशी इस जोखिम से बच रहे हैं। हाल ही में कुछ कैश पकड़े जाने के मामले सामने आने के बाद प्रत्याशी और घबराये हुए हैं।