देश के आधे से ज्यादा वकीलों की आ गई शामत
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देश में आधे से ज्यादा वकीलों की शामत आने वाली है। वेरिफिकेशन न होने के कारण देश में आधे से अधिक वकील बार काउंसिल से बाहर हो सकते हैं।
अभी तक दस लाख वकीलों का वेरिफिकेशन नहीं हो पाया है, जबकि अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इन आंकड़ों से बार काउंसिल ऑफ इंडिया भी हैरान है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा के मुताबिक इससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में लोग अन्य व्यवसायों से जुड़े होने के बावजूद बार कौंसिलों में पंजीकृत हैं, यह बड़ा फर्जीवाड़ा है।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देश पर देश भर में वकीलों का वेरिफिकेशन चल रहा है। अभी तक देश में साढ़े सोलह लाख वकीलों में से सिर्फ साढ़े छह लाख के वेरिफिकेशन फॉर्म ही जमा हुए हैं।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा बताते हैं कि दो से ढाई महीने के बीच वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। आधे से अधिक वकीलों के फॉर्म न पहुंचने के पीछे यह माना जा रहा है कि बड़े पैमाने पर फर्जी तरीके से लोग बार काउंसिल से जुड़े हैं।
यह वह लोग हैं जो अन्य व्यवसाय कर रहे हैं। वहीं इसके पीछे यह भी हो सकता है कि कुछ लोगों के निधन के बावजूद उनका नाम जुड़ा हो। उन्होंने कहा कि देश भर में वकीलों के वेरिफिकेशन की मंशा भी यही थी कि गलत लोगों को बार काउंसिल से बाहर किया जा सके।
प्रदेश में 4000 वकील हो सकते हैं बाहर
उत्तराखंड में 4000 से अधिक वकील बार काउंसिल से बाहर हो सकते हैं, इन वकीलों का बार काउंसिल से वेरिफिकेशन नहीं हो पाया है। प्रदेश में बार काउंसिल से पंजीकृत 13254 वकीलों में से अब तक 7200 के ही वेरिफिकेशन फार्म पहुंचे हैं।
बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड की विशेष कमेटी के सदस्य हरीश सिंह नेगी व चंद्रशेखर तिवारी के मुताबिक उत्तराखंड में वर्ष 2010 के से पहले 9500 और इसके बाद के 3754 वकील पंजीकृत हैं।
गड़बड़ा सकते हैं चुनावी समीकरण
दून बार एसोसिएशन के चुनाव में इस बार कुछ वकील मतदान नहीं कर पाए थे। यही वजह रही कि कुछ दावेदारों के चुनावी समीकरण गड़बड़ा गए। यह माना जा रहा है कि देश भर में यदि आधे वकील बार काउंसिल से बाहर हुए तो विभिन्न बार एसोसिएशनों में चुनावी समीकरण गड़बड़ा जाएंगे।