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Landslide In Joshimath: भू-धंसाव रोकने को होंगे अस्थायी कार्य, परिवारों के विस्थापन का तैयार होगा प्रस्ताव

Mon, 02 Jan 2023 09:01 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 02 Jan 2023 09:01 PM IST
सार

इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सक्रिय होने के बाद राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा प्रस्तुत किया है।

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Landslide In Joshimath: Temporary work will be done to prevent landslides
जोशीमठ में घरों पर पड़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जोशीमठ में हो रहे भू-धंसाव को रोकने के लिए अस्थायी सुरक्षा कार्य किए जाएंगे। इन कार्यों को करने के लिए सिंचाई विभाग के प्रस्ताव पर छह कंपनियों ने रुचि दिखाई थी। इनमें से चार फार्मों का चयन किया गया है। अब इन फर्मों की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले तकनीकी प्रस्तावों पर 20 जनवरी को निर्णय लेते हुए फर्म का चयन किया जाएगा। इसके साथ ही असुरक्षित हो चुके भवनों में रह रहे लोगों को दूसरे स्थानों पर बसाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। 

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इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सक्रिय होने के बाद राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा प्रस्तुत किया है। अपर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग डॉ. आनंद श्रीवास्तव ने बताया कि जोशीमठ शहर मुख्यत: पुराने भूस्खलन क्षेत्र के ऊपर बसा है। इस प्रकार के क्षेत्रों में जल निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कई बार भू-धंसाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जोशीमठ शहर में वर्ष 1970 के दशक से हल्का भू-धंसाव हो रहा है। फरवरी 2021 में धौलीगंगा में आई बाढ़ के कारण अलकनंदा नदी ने तटीय इलाकों में कटाव किया है, तब से इस समस्या ने गंभीर रूप ले लिया है। 
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वैज्ञानिकों की टीम ने अगस्त में प्रस्तुत कर दी थी अपनी रिपोर्ट 
डॉ. आनंद ने बताया कि भू-धंसाव व भूस्खलन का अध्ययन करने के लिए आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग की ओर से जुलाई 2022 में एक विशेषज्ञ दल का गठन किया गया था। इसमें उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अलावा आईआईटी रुड़की, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग और वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों को शामिल किया गया था। विशेषज्ञ दल 16 से 20 अगस्त 2022 के मध्य क्षेत्र का सर्वेक्षण कर अपनी रिपोर्ट दे दी थी। 

रिपोर्ट में ये उपाय सुझाए थे
- भू-धंसाव के लिए वर्षा एवं घरों से निकलने वाले पानी के निस्तारण की व्यवस्था करना 
- अलकनंदा नदी की ओर से किए जा रहे कटाव को नियंत्रित करने के लिए तटबंध बनाना
- शहर से होकर बहने वाले नालों का सुदृढ़ीकरण एवं चैनेलाइजेशन करने
- क्षेत्र की कैरिंटिंग कैपेसिटी के कार्यों को नियंत्रित किए जाने का सुझाव दिया गया था 

कमेटी की रिपोर्ट पर सिंचाई विभाग को करने थे काम 
वैज्ञानिकों की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट के बाद सचिव, आपदा प्रबंधन एव पुनर्वास विभाग की अध्यक्षता में नवंबर 2022 में एक बैठक का आयोजन कर कमेटी की ओर से सुझाए गए उपायों पर काम करने के लिए सिंचाई विभाग को निर्देश जारी किए गए थे। इसके बाद सिंचाई विभाग की ओर से फर्मों से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे।

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