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रजिस्टर का पन्ना किसने फाड़ा?
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 07 Dec 2013 02:17 PM IST
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नकरौंदा में जमीन खरीद के मामले में झूठ, फरेब और छल-कपट के साथ खूब खेल हुआ। अब मालिकाना रजिस्टर में जहां जमीन का मामला दर्ज था वह पन्ना गायब है।
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इतना ही नहीं हाईकोर्ट के आदेश पर खाता सीज करने की कार्रवाई में गलती करने वाले लेखपाल का भी कुछ नहीं बिगड़ा। कुबेर ने इसी विवादित भूखंड को चार टुकड़ों में बेच डाला था।
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बाहरी कंपनियों खरीद रही जमीन
नकरौंदा मामले से एक बात साफ हो गई कि बाहरी कंपनियां यहां के जमीनी मामलों में गहराई तक जुड़ी हैं। वेलहम गर्ल्स सोसाइटी की भूमि के जिस खाते को सीज करने का मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने आदेश दिया उसमें तीन खसरे थे।
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तत्कालीन लेखपाल ने तीनों खसरों के बजाए सिर्फ एक को ही सीज किया। इससे 11 एकड़ भूमि तो सीज हो गई जबकि 23 एकड़ जमीन खुली रही।
खाता सीज करने में गलती
सवाल यह उठता है कि कुबेर प्लांटर्स को कैसे पता चला कि लेखपाल से खाता सीज करने में गलती हुई है। कुबेर ने आनन-फानन में जमीन का सौदा कर लिया।
इतना ही नहीं कुबेर ग्रुप ने इसे अपने नाम कराने के साथ ही चार टुकड़ों में बेच भी दिया। इस बीच मामला विवादित होने के बाद जमीन सील हो गई।
फिर कुबेर ग्रुप ने खतौनी में नाम चढ़वाने के लिए हाईकोर्ट के आदेश जिला प्रशासन को दिए। मामला दाखिल-खारिज होने के बाद कोर्ट का आदेश लाने पर जिलाधिकारी को शक हुआ तो इसकी जांच कराई गई।
लेकिन इस मामले में अभी और भी पेंच हैं। सूत्रों का कहना है कि मालिकाना रजिस्टर से वह पन्ना नदारद है जिसमें जमीन की डीटेल थी।
कोई आदेश पहले इस रजिस्टर पर दर्ज होता है, फिर खतौनी में चढ़ता है। जांच में इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। जिस लेखपाल की गलती के कारण इतना बवाल हुआ है उसके खिलाफ कार्रवाई भी नहीं हुई।