भारत-चीन सीमा पर गंगोत्री ग्लेशियर में भारी हिमस्खलन से बनी झील!
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गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में हिमस्खलन की सूचना से शासन-प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
हिमस्खलन की पुष्टि के लिए जिला प्रशासन ने एक टीम को गोमुख रवाना कर दिया है, लेकिन मौसम खराब होने के चलते टीम को गोमुख तक पहुंचने में बर्फबारी की दुश्वारियों से जूझना पड़ेगा।
सोमवार रात शासन को भारत-चीन सीमा की ओर गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में हिमस्खलन की सूचना मिली। बताया जा रहा है कि सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें सूचना का स्रोत हैं। इसमें हिमस्खलन से सीमा की ओर झील बनने का अंदेशा जताया गया है।
नजर बनाए हुए हैं वैज्ञानिक
हालांकि अभी यह बात पुष्ट नहीं है। आपदा सचिव अमित नेगी ने इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम उत्तरकाशी को सूचना की सत्यता की जांच कराने के निर्देश दिए। उत्तरकाशी डीएम डा. आशीष चौहान ने बताया कि शासन से मिले निर्देश पर एक संयुक्त टीम गठित कर गंगोत्री ग्लेशियर की ओर भेजी गई है।
हिमस्खलन की सूचना अपुष्ट है। टीम को बर्फबारी के बीच सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही आगे बढ़ने को कहा गया है। टीम के लौटने पर वास्तविक स्थिति का पता चल पाएगा। वहीं, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि गंगा भागीरथी के प्रवाह पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल नदी में 45 क्यूमेक्स वाटर डिस्चार्ज हो रहा है। बीते दिनों में इसमें कोई बदलाव नहीं आया है।
गंगोत्री ग्लेशियर में हो रहा है बदलाव
मौसम में आए बदलाव के चलते गंगोत्री ग्लेशियर में काफी बदलाव हो रहा है। गोमुख से चौखंबा ग्लेशियर तक करीब 28 किमी लंबाई में पसरे इस ग्लेशियर से जुड़ने वाले कई छोटे ग्लेशियर पिघलकर समाप्त हो चुके हैं।
मुख्य ग्लेशियर से इनके जुड़ाव स्थल बर्फ विहीन होने और ग्लेशियर की ऊपरी सतह पिघलने से पानी का भराव भी झील का आभास देता है। इस तरह की झीलें ग्लेशियर की सेहत के लिए खतरनाक मानी जा रही हैं।
बीती बरसात में ग्लेशियर के मुहाने गोमुख के पास इसी तरह की एक झील के दरकने के बाद पानी के साथ मलबा आने से नदी का प्रवाह पथ ही दूसरी ओर मुड़ गया था। माना जा रहा है कि इसी तरह के बदलाव सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में सामने आने पर शासन-प्रशासन अलर्ट हुआ है।