पुलिस ने की लाडली के गुनाहगार की 'मदद'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिर भी पुलिस ने इस सूचना पर ध्यान नहीं दिया। इस बारे में एक चाय विक्रेता ने भी पुलिस को चालक की हुलिया के बारे में जानकारी दी थी लेकिन पुलिस ने उस पर भी यकीन नहीं किया।
घटना के दूसरे दिन फोन करने पर चालक ने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया। यदि पुलिस चालक को पकड़कर उसके कपड़े उतरवाती या उसके ठिकाने की तलाशी लेती तो घटना का खुलासा हो सकता था।
पुलिस एक समय में एक ही काम करती रही, जो सामान्य तरीके के खिलाफ है। उसे कई एंगल पर एक साथ काम करना चाहिए था। सच कहा जाय तो पुलिस इस मामले में साधु की तरफ तहकीकात करती रही और क्रिमिनल उससे कई गुना आगे निकल गया।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यहां एक और बात ध्यान देने की है कि किसी भी विवाह में बाहर से आए बच्चे लोकल बच्चों से घुल-मिल नहीं पाते हैं और अलग पड़ जाते हैं।
इसलिए उनका ध्यान रखना ज्यादा जरूरी है। ऐसे शादी समारोह में बाहर के लोग खाना खाने और मौज मस्ती करने आ जाते हैं, इसलिए उन पर भी निगाह रखनी जरूरी है।
ताऊ ने जिसे पकड़ा था पुलिस ने उसी को दबोचा
लाडली हमारे बीच से चली गई। उसके इस तरह दुनिया से जाने का सबको गम है। लेकिन अगर उत्तराखंड पुलिस ने तत्परता दिखाई होती तो शायद लाडली आज हमारे बीच होती।
पुलिस की छोटी सी लापरवाही से हत्यारा हल्द्वानी से भागने में कामयाब हो गया। जिस संदिग्ध डंपर ड्राइवर को पुलिस ने लुधियाना से दबोचा है उसी ड्राइवर को घटना के ही दिन लाडली के ताऊ ने पकड़ा था।
शीशमहल के लोगों के हस्तक्षेप पर ड्राइवर बच गया और फरार हो गया। अब लाडली हत्याकांड की पूरी जांच ड्राइवर से पूछताछ पर टिक गई है।
20 नवंबर की शाम करीब साढ़े सात बजे लाडली शीशमहल रामलीला मैदान से अचानक गायब हुई थी। वह परिजनों के साथ शादी समारोह में आई थी। 25 नवंबर को गौला में झाड़ियों से उसका शव मिला।
लाडली के चाचा का आरोप है कि पुलिस की चूक के चलते ही भतीजी की हत्या हुई।
पुलिस ने ताऊ की बात नहीं मानी
लड़की के चाचा के मुताबिक जिस दिन लाडली गायब हुई थी उसके बड़े भाई (लाडली के ताऊ) समेत उन्होंने पूरी रात आसपास क्षेत्र में उसकी तलाश की। रामलीला ग्राउंड के पास ही कई ट्रक खड़े थे।
एक ट्रक के अंदर चालक दिखा। जब लाडली के ताऊ ने उसे ट्रक से नीचे उतरने को कहा तो उसने दरवाजा नहीं खोला। काफी जद्दोजहद के बाद चालक को दबोचकर बाहर निकाला।
उसकी संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए उसे पुलिस को सौंपने के लिए ले जाने लगे। चाचा का आरोप है कि इतने में शीशमहल क्षेत्र के कुछ लोग डंपर मालिक वहां पहुंचे और ड्राइवर को पुलिस के हवाले करने से मना कर दिया।
इसकी पूरी जानकारी पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस ने इसे हल्के में लिया। अगले दिन ड्राइवर शीशमहल से लापता हो गया और तभी से उसका फोन बंद जा रहा है।
शीशमहल में ही चाय की दुकान चलाने वाले किशन सिंह ने भी उसी दिन ड्राइवर पर शक जाहिर किया था, लेकिन किशन सिंह की बात किसी ने यकीन नहीं किया।
ट्रक के पास मिला था लाडली का हेयर बैंड
ड्राइवर के लापता होने पर जब पुलिस छानबीन हुई तो कई खुलासे हुए। पुलिस सूत्र बताते हैं कि चालक उसी दिन शीशमहल में शंकर के डंपर पर आया था।
ड्राइवर ने पहले दिन शंकर से तीन हजार रुपए एडवांस भी लिए। इससे पहले वह कन्नू का ट्रक चलाता था। दो साल तक उसने कन्नू का ट्रक भी चलाया।
कन्नू और शंकर को लापता चालक के मोबाइल नंबर के अलावा कुछ भी पता नहीं है। लाडली के शव के पास से मिली बीड़ी की ठुड्डियां और ट्रक के पास मिला उसका हेयर बैंड भी ड्राइवर की संदिग्धता की ओर इशारा कर रहा है। पुलिस ने इन दोनों डंपर स्वामियों को बुलाकर पूछताछ की।
इसी आधार पर स्केच जारी किया। स्केच की तस्दीक कराने के लिए गुरुवार को किशन सिंह को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया। किशन सिंह ने बताया कि स्केच ड्राइवर से मिलता-जुलता है।