गम और गुस्से के बीच विदा हुई लाडली, उमड़ा जनसैलाब
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आखिर सात दिन बाद गम और गुस्से के बीच ‘लाडली’ (काल्पनिक नाम) के शव का अंतिम संस्कार चित्रशिला घाट पर कर दिया गया। शवयात्रा में पहाड़ से मैदान तक, गांव से शहर तक के लोग शामिल हुए। अंतिम विदाई के दौरान जनसैलाब उमड़ा। बरेली रोड और नैनीताल रोड होते हुए शवयात्रा शवयात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई लोग शामिल होते गए।
पुलिस-प्रशासन के अधिकारी भी अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद रहे। 25 नवंबर को बच्ची का शव मिलने के बाद दो दिन तक परिजन दरिंदों की गिरफ्तारी के बाद ही अंतिम संस्कार करने की बात पर अड़े रहे। पिथौरागढ़ से शादी समारोह में शामिल होने आई बच्ची का हल्द्वानी में 20 नवंबर को अपहरण कर लिया गया था।
दुष्कर्म के साथ उसकी हत्या कर दी गई थी। इससे पूरा उत्तराखंड दहल उठा। आक्रोशित लोगों ने बृहस्पतिवार को भी पूरे प्रदेश में जगह-जगह प्रदर्शन किए। भीमताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, गरुड़, टनकपुर, लोहाघाट, अस्कोट और बेड़ीनाग के अलावा कई छोटे-छोटे कस्बे बंद रहे। स्कूली बच्चे भी सड़कों पर उतरे। बाजार, स्कूल, कालेज, डाकघर, बैंक, सरकारी कार्यालयों में कामकाज ठप रहा।
अंतिम यात्रा देखने के लिए लोगों का तांता
बृहस्पतिवार दोपहर करीब एक बजे बच्ची के पिता, चचेरा भाई और अन्य परिजन पुलिस अधिकारियों के साथ मोर्चरी पहुंचे। शव को डीप फ्रीजर से निकालकर कफन में लपेटा गया। इसके बाद लोगों ने वहीं फूल मालाएं और चक्र चढ़ाकर उसे श्रद्धांजलि दी।
भारी सुरक्षा के बीच शव को एक महिंद्रा मैक्स में रखकर शवयात्रा शुरू की गई। शवयात्रा गांधी इंटर कॉलेज से होते हुए बरेली रोड को निकली।
लोगों ने ‘लाडली तुम अमर रहो, पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद, लाडली के कातिलों को गिरफ्तार करो’ जैसे नारे लगाए। शव यात्रा के दौरान परिजनों समेत कई लोग बिलख पड़े। लोगों में गम के साथ भारी गुस्सा भी था।
जाम और बवाल की आशंका के चलते जगह-जगह भारी पुलिस फोर्स तैनात थी। कई जगह यातायात डायवर्ट किया गया था। चित्रशिला घाट पर पूरे सम्मान एवं नम आंखों से शव को दफनाया गया।