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इंसाफ की लड़ाई में लगे 25 साल, लेकिन वो जीत गई
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 10 Feb 2014 09:36 AM IST
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पति को मिली पट्टे की जमीन के लिए 25 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रही देहरादून की 72 वर्षीय कुंती देवी को जीत मिल गई।
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दुश्वारियों से जूझना पड़ा
इतने लंबे अंतराल में कुंती को जिन दुश्वारियों से जूझना पड़ा, उसकी भरपाई शायद ही कोई कर पाए। पट्टा आवंटन पर ही सवाल उठाए जाने के बाद न्याय की उम्मीद लगाए उनके पति भंगूराम भी एक दशक पहले दुनिया छोड़ चुके हैं।
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प्रेमनगर में दर्जी का काम करने वाले भंगूराम को वर्ष 1973 में परिवार नियोजन पर अटकफार्म में सरकार से 2.50 एकड़ जमीन का पट्टा मिला। कुछ दिन बाद ही भूमि को लेकर विवाद शुरू हो गया।
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भंगू की जमीन न सिर्फ कब्जाने की कोशिश की गई, बल्कि आवंटन को गलत करार देते उनकी शिकायत कर दी गई। 1989 में मामला दर्ज हुआ और जांच शुरू हुई।
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2009 में न्यायालय अपर कलक्टर प्रशासन ने मात्र 1.40 एकड़ भूमि भंगूराम को बहाल करने का फैसला सुनाया। बाकी 1.10 एकड़ हटाने के आदेश दिए गए। फैसले को न्यायालय राजस्व परिषद में चुनौती दी गई।
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करीब पांच साल बाद न्यायालय ने बीती 27 जनवरी में भंगूराम की 1.10 एकड़ भूमि राज्य सरकार के पक्ष में प्रत्यावर्तित करने के फैसले को निरस्त कर भूमि का मूल आवंटन बहाल कर दिया।
अभी भी दखलअंदाजी जारी
25 साल बाद अदालत से कुंती को इंसाफ मिला, लेकिन अपनी जमीन पर पूरी तरह से काबिज होने का ख्वाब अभी भी अधूरा है। कुछ लोग जमीन पर दखलअंदाजी कर रहे हैं। आरोप है कि कुछ दिन पहले बुजुर्ग से मारपीट भी की गई थी।
देखने पड़े कई उतार-चढ़ाव
लंबी कानूनी लड़ाई के बीच कुंती देवी को कई उतार-चढ़ाव देखने पड़े। जमीन पर नजर गड़ाए कुछ लोगों की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ और जांच में तहसीलदार ने संदेहजनक बताते हुए पट्टा निरस्त करने की सिफारिश कर दी थी।
राजस्व कर्मियों से खिन्न है परिवार
कुंती के परिजन राजस्व विभाग के कर्मचारियों की भूमिका से खिन्न हैं। उनका कहना है कि प्रशासन और कोर्ट से कई बार भूमि की पैमाइश के आदेश हुए।
मगर राजस्व विभाग के लोग नपाई के लिए नहीं आए। प्रशासन को मौके पर आकर भूमि पर हो रही दखल अंदाजी रोकना चाहिए था।