{"_id":"25a66e60e926045186f1be8ea41d5b24","slug":"kumaoni-holi","type":"story","status":"publish","title_hn":"यहां रागों संग मनता है रंगों का त्योहार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यहां रागों संग मनता है रंगों का त्योहार
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 03 Mar 2014 09:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड में भी कुमाऊंनी होली की खास पहचान है। दो तरीके से होली मनाई जाती है-बैठकी और खड़ी होली। बैठकी होली में रंगों का त्योहार रागों के साथ मनाया जाता है।
विज्ञापन
बाकी जगह होली 14 मात्राओं में गाई जाती है, लेकिन कुमाऊं में दो मात्राएं अधिक हैं। रातभर चलने वाले होली गायन में राधा-कृष्ण के प्रेम और शिव आराधना पर आधारित नौ राग गाए जाते हैं।
विज्ञापन
वसंत पंचमी से ही बैठकी होली शुरू हो जाती है। जबकि खड़ी होली की शुरुआत मुख्य पर्व से पांच दिन पहले होती है। मंदिर में पूजन के बाद सफेद वस्त्र पहन रंग खेलकर खड़ी होली मनाई जाती है।
विज्ञापन
यह है बैठकी होली
बैठकी का तात्पर्य बैठने से है। कुमाऊंनी परंपरा के अनुरूप लोग किसी सार्वजनिक स्थल पर जुटते हैं और फिर बैठकर रातभर होली गीत गाते हैं। वक्त के साथ अब लोग सामूहिक तौर पर नहीं जुट पाते। ऐसे में घर-घर इस तरह के आयोजन होने लगे हैं।
कब, कौन सा राग
शुरुआत: राग यमन
इसके बाद: काफी, जंगला काफी, खम्माज, देश राग, पीलू, देर रात को विहाग
सुबह समापन: भैरव और भैरवी राग के साथ
...तो हेमंत बनाएंगे डाक्यूमेंट्री
मूलत: पिथौरागढ़ निवासी बालीवुड गायक हेमंत पंत के गायन की शुरुआत भी होली से हुई। हेमंत बताते हैं कि रागों का सरलीकरण करने के लिए इन्हें 16 मात्राओं में बांटा गया।
हालांकि, बाकी लोग यह होली नहीं गा पाते लेकिन कुमाऊं के लोगों को यह बहुत आसान लगता है। बताया कि इस होली को दुनिया जाने, इसके लिए संस्कृति विभाग से बात की है। फंड मिला तो वह इस पर डाक्यूमेंट्री बनाएंगे।