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किशाऊ परियोजनाः लाभ में उत्तराखंड-हिमाचल बराबर हिस्सेदारी
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 21 Jun 2015 01:00 PM IST
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किशाऊ बहुउद्देशीय जल विद्युत परियोजना पर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के बीच शनिवार को समझौता पत्र(एमओयू) साइन हो गया।
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दो दशकों से आमसहमति न बन पाने से लटकी 660 मेगावाट की इस परियोजना के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ में दोनों राज्यों की बराबर की हिस्सेदारी रहेगी। हिमाचल की परियोजना से जुड़ने वाली डाउन स्ट्रीम (अन्य छोटी पांच परियोजनाओं) में बढ़ने वाले विद्युत उत्पादन में 50 फीसदी की हिस्सेदारी पर उत्तराखंड पहले ही राजी हो चुका है।
परियोजना के लिए बनाए जाने वाले संयुक्त उपक्रम पर मुख्यमंत्री हरीश रावत की उपस्थिति में सीएम आवास पर हिमाचल के प्रमुख सचिव ऊर्जा एसकेबीएस नेगी और उत्तराखंड के ऊर्जा सचिव उमाकांत पंवार ने एमओयू पर साइन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि दोनों राज्य भाइयों की तरह हैं और दो भाई मिलकर आगे बढ़ें इससे बेहतर क्या हो सकता है।
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उन्होंने बताया कि किशाऊ परियोजना पर केंद्र का योगदान 90 प्रतिशत जबकि दोनों राज्यों का पांच-पांच प्रतिशत होगा। दिल्ली की पेयजल समस्या दूर होगी, साथ ही यमुना नदी के पुनर्जीवन में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पूरा प्रयास करेगी कि जमरानी बांध परियोजना पर भी उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश के बीच जल्द सहमति बने। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, संसदीय सचिव प्रदीप बत्रा, मुख्य सचिव एन रविशंकर, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन के एमडी देवेंद्र कुमार शर्मा, रेणुकाजी बांध परियोजना के वरिष्ठ प्रबंधक आरपी वर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
निर्माण की औपचारिकताएं जल्द होंगी पूरी
मुख्य सचिव एन रविशंकर ने बताया कि किशाऊ परियोजना निर्माण के लिए संयुक्त उपक्रम बन गया है। परियोजना के निर्माण संबंधी औपचारिकताएं जल्द पूरी की जाएंगी, जिसके लिए संयुक्त उपक्रम प्रभावित लोगों को राहत व पुनर्वास के लिए मानकों के अनुरूप कार्य शुरू करेगा।