इस वीर सपूत के लिए सभी प्रोटोकॉल तोड़ दिए थे किंग जार्ज ने, युद्ध मैदान में ही दिया विक्टोरिया क्रॉस

ब्यूरो/अमर उजाला, कर्णप्रयाग Updated Fri, 08 Dec 2017 08:10 AM IST
वीर सपूत दरबान सिंह को सम्मानित करते किंग जार्ज
वीर सपूत दरबान सिंह को सम्मानित करते किंग जार्ज
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उत्तराखंड के इस वीर सपूत के अदम्य साहस को देखते हुए किंग जार्ज पंचम ने सभी प्रोटोकाल तोड़ दिए थे और युद्ध के मैदान में ही उन्हें प्रथम विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित किया। जब पुरस्कार मांगने को कहा तो पढ़िए क्या मांगा इस वीर सपूत ने...
आज (पांच दिसंबर) का दिन चमोली सहित अपर गढ़वाल के लिए ऐतिहासिक दिन है। 103 वर्ष पूर्व वर्ष 1914 में आज के ही दिन यानी 5 दिसंबर को फ्रांस में गढ़वाल राइफल के नायक और चमोली जिले के कफारतीर गांव के वीर सपूत को किंग जार्ज पंचम ने विक्टोरिया क्रास से सम्मानित किया था।

तब किंग जार्ज पंचम ने दरबान सिंह से पुरस्कार स्वरूप कुछ मांगने के लिए कहा तो दरबान ने चमोली जिले के केंद्र बिंदु कर्णप्रयाग में स्कूल और ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल लाइन बनाने की मांग की। पुरस्कार के रूप में मांगा गया कर्णप्रयाग का यह स्कूल आज शताब्दी समारोह मना रहा है।

कर्णप्रयाग में स्कूल और हरिद्वार-ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल लाइन की मांग की
चमोली के दूरस्थ गांव कफारतीर में स्व. कलम सिंह नेगी के घर वर्ष 1881 में जन्मे दरबान सिंह नेगी वर्ष 1902 में प्रथम बटालियन 39 गढ़वाल राइफल में भर्ती हुए थे। प्रथम विश्व युद्घ में दरबान सिंह नेगी के अदम्य साहस को देखते हुए 5 दिसंबर 1914 को किंग जार्ज पंचम ने सभी प्रोटोकाल तोड़ते हुए फ्रांस में युद्घ के मैदान में ही दरबान सिंह को प्रथम विक्टोरिया क्रास से सम्मानित किया।

इस दौरान सेना के कुल छह सैनिकों को वीसी सम्मान से नवाजा गया, इनमें दरबान सिंह का सबसे पहले स्थान था। सामाजिक कार्यकर्ता भुवन नौटियाल बताते हैं कि इस दौरान किंग जार्ज पंचम ने दरबान की वीरता से खुश होकर पुरस्कार मांगने की बात कही, तो दरबान ने चमोली के केंद्र बिंदु कर्णप्रयाग में स्कूल और हरिद्वार-ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल लाइन की मांग की। तब देश में आजादी के लिए लोग एकजुट हो रहे थे, जिसके लिए अपर गढ़वाल में शिक्षा और विकास का होना जरूरी था।
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फ्रांस में मांगा गया कर्णप्रयाग का स्कूल आज अपने 100 साल पूरे करने जा रहा

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