देखिए तो जरा, पहली बार मिला किंग कोबरा का आशियाना
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दुनिया में पाए जाने वाले सांपों में सबसे बड़े जहरीले सांप किंग कोबरा का आशियाना देहरादून में मिला है। सहस्त्रधारा के पास मिला यह घोंसला गढ़वाल मंडल में इसे पहला किंग कोबरा का घोंसला बताया जा रहा है। खास बात यह है कि दुनियाभर के सरीसृप प्रजातियों में किंग कोबरा ही ऐसा जीव है, जो अपना घोंसला बनाता है।
वन्य जीव एवं सरीसृप विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक सिंह ने मसूरी वन प्रभाग के सहयोग से सहस्त्रधारा के निकट किंग कोबरा का आशियाना चिह्नित किया है। अब तक केवल कुमाऊं मंडल में सात साल पहले वन्य जीव विशेषज्ञों ने किंग कोबरा का घोंसला पहचाना था।
इस घोंसले के पगडंडी के निकट मिलने से यह बात भी साफ हो गई है कि यह खतरनाक जहरीला सांप मानव आबादी के निकट रहने का आदी होने लगा है। अभी तक इसका घोंसला घने जंगलों में पाया जाता रहा है।
सहस्त्रधारा के निकट एक गांव की पगडंडी पर किंग कोबरा का घोंसला है। यह करीब एक वर्ग मीटर चौड़ाई में है, इसकी ऊंचाई करीब एक मीटर है। घोंसले में अंडे हैं। मादा किंग कोबरा अंडे देने के करीब 20 दिन तक रखवाली करने के बाद घोंसले को छोड़कर जा चुकी है।
मसूरी वन प्रभाग ने फि लहाल घोंसले और इसमें मौजूद करीब 15 अंडों की सुरक्षा के लिए पगडंडी से आवाजाही बंद कर दी है। माना जा रहा है कि कुल 90 दिनों का अंतराल पूरा करने के बाद अंडों से बच्चे निकल आएंगे। वन विभाग और सरीसृप विशेषज्ञ आने वाले नन्हे मेहमानों को सुरक्षित रखने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
साल में एक बार अंडे देती है मादा किंग कोबरा
किंग कोबरा भारत के पश्चिमी घाट, कनार्टक, गोवा, केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों के अलावा बिहार, उडीसा, पश्चिमी बंगाल और अंडमान निकोबार तक पाया जाता है।
विदेशों में यह दुर्लभ प्रजाति का सांप बांग्लादेश, भूटान, नेपाल से लेकर फिलीपींस तक पाया जाता है। इसकी लंबाई करीब 15 फुट तक होती है। यह साल में एक बार अंडे देती है। डॉ. अभिषेक सिंह ने बताया कि यह एकमात्र ऐसा सांप है, जिस पर
दक्षिणी भारत में रेडियो कॉलर लगाकर रिसर्च की गई है। सरीसृप वर्ग में इसे टाइगर के बराबर ओहदा मिला हुआ है।
बड़ी कामयाबी
वन विभाग और वन्य जीव विशेषज्ञ इसे एक बड़ी कामयाबी मानकर चल रहे हैं। अभी तक आवासीय क्षेत्रों में अपेक्षाकृत इसकी पहुंच कम थी। माना जा रहा है कि आबादी के निकट किंग कोबरा का घोंसला इसके प्रवास के बदलाव की ओर इशारा कर रहा है।
विशेषज्ञ टीम के सदस्य राजशेखर सिंह के मुताबिक उनकी टीम इस पर नजर रखेगी। वन विभाग ने भी अपना कर्मचारी तैनात कर दिया है। पहली बार गढ़वाल मंडल में किंग कोबरा का घोंसला सहस्त्रधारा के आसपास के क्षेत्रों में भी कौतूहल का विषय बना हुआ है।