शंकराचार्य की समाधि पर चढ़ेगी पीओके की मिट्टी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदुओं की आस्था के प्रतीक विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर परिसर और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) की मिट्टी से ‘मिशन किलाड़ी टू केदार कलश यात्रा’ का कलश पूरा होगा।
तस्वीरों में देखिए, 'पाताल' में भारत का एक मतदान केंद्र
इसके बाद केदारनाथ स्थित आदि गुरु शंकराचार्य की समाधि पर 16 जून को आपदा का एक साल पूरा होने पर यह मिट्टी समर्पित की जाएगी। यात्रा आदि गुरु की समाधि की पुनर्स्थापना के लक्ष्य से की जा रही है।
मंत्रोच्चार के साथ राज्यपाल ने डाली मिट्टी
मिशन कलाड़ी टू केदार पवित्र कलश यात्रा के देहरादून पहुंचने पर बृहस्पतिवार को राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी ने मंत्रोच्चार के साथ पवित्र कलशों में मिट्टी डाली।
इस दौरान राज्यपाल ने 16 जून को आपदा के एक साल पूरे होने पर मिट्टी समर्पित करते समय केदारनाथ आने का भी वादा किया। फेथ फाउंडेशन, भारत आनंद के तत्वावधान में केरल से शुरू हुई यात्रा बुधवार शाम देहरादून पहुंची।
सुबह कलशों में टपकेश्वर महादेव, बालाजी धाम, गुरु द्रोण की गुफा सहस्त्रधारा और सनातन धर्म मंदिर प्रेमनगर की मिट्टी डाली गई। दोपहर 12 बजे राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी ने दोनों कलशों में उत्तराखंड की ओर से मिट्टी डाली।
नेपाल का पशुपतिनाथ मंदिर होगा खास पड़ाव
सुरक्षित केदारनाथ और सुरक्षित उत्तराखंड के उद्देश्य के साथ केरल से शुरू हुई मिशन किलाड़ी टू केदार कलश यात्रा का 16 जून को केदारनाथ में आदि गुरु शंकराचार्य की समाधि स्थल पर समापन होगा।
पढ़ें, चारधाम यात्रा पर जाने वालों के लिए जरूरी खबर
इससे पहले करीब 132 दिन लंबी यात्रा का काफिला देश के 20 राज्यों से होकर गुजरेगा। सबसे खास होगा नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर परिसर का पड़ाव। यहां की पवित्र मिट्टी लेने के लिए विशेष दल मई में नेपाल जाएगा।
इसके बाद जम्मू एवं कश्मीर और पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित पुण्य क्षेत्र की मिट्टी कलश में ली जाएगी। इसके बाद बद्रीनाथ की मिट्टी मिलने के बाद केदारनाथ में समर्पित की जाएगी।
ली जा चुकी है 18 राज्यों की मिट्टी
मिशन के हेड कर्नल (रिटायर्ड) अशोक किनी ने बताया कि चारों शंकराचार्यों की अनुमति के बाद 14 फरवरी को आदि गुरु शंकराचार्य की जन्मस्थली किलाड़ी से यात्रा शुरू की गई थी। जिस मार्ग पर आदि शंकराचार्य धर्म प्रचार के लिए निकले थे, यात्रा उन सभी राज्यों में जा रही है।
पढ़ें, किन्नर महासम्मेलन: पहुंचे देश भर के किन्नर गुरु
अब तक 18 राज्यों से कलश में मिट्टी ली जा चुकी है। जल्द ही असम के गुवाहाटी स्थित कामाख्या देवी मंदिर से भी मिट्टी ली जाएगी। किनी ने बताया कि यात्रा में दो कलश, सर्वधर्म और वैदिक रखे गए हैं।