अब बरसात में भी होगी केदारनाथ यात्रा!
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उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में हो रही बरसात के दौरान भी यात्रियों को केदारनाथ जाने की छूट रहेगी। जिला प्रशासन का कहना है कि इस बार केदारनाथ यात्रा नियंत्रित तरीके से चल रही है।
शासन-प्रशासन की यात्रा रोकने की कोई मंशा नहीं है। उनका कहना है कि मौसम ज्यादा खराब होने पर ही यात्रा स्थगित की जा रही है।
पिछले कुछ दिनों से मानसून काल में यात्रा रोकने की चर्चाएं चल रही थीं। डीएम राघव लंगर ने बताया कि यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं।
पैदल मार्ग पर एसडीआरएफ और एसटीएफ के दल तैनात हैं। इसके अलावा निम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) उत्तरकाशी के लोग भी यहां काम कर रहे हैं।
भैयादूज के दिन कपाट बंद होगा
एसडीआरएफ और एसटीएफ का कहना है कि मौसम पूरी तरह से यात्रा के अनुकूल है। प्रतिदिन लगभग 700 से यात्री आ रहे हैं। जून माह के मध्य से लेकर जुलाई-अगस्त माह तक यात्रियों की आमद कम होती है।
इसके बाद द्वितीय चरण में सितंबर से यात्रियों की संख्या बढ़ती है। डीएम ने बताया कि केदारनाथ मंदिर के समीप प्रवचन हाल के बगल में हेलीपैड का निर्माण किया जा रहा है। ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति में यहां हेलीकाप्टर लैंड कर सके।
यहां वैली ब्रिज का भी निर्माण हो रहा है। यात्रियों की सुरक्षा के बारे में उन्होंने बताया कि मौसम विभाग से मौसम का पूर्वानुमान मिलता रहता है।
जैसा पूर्वानुमान मिलता है, वैसा ही संदेश यात्रा से जुड़े विभागों को भेजा जाता है। जरूरत पड़ने पर यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया जाता है। ऐसा ही आगे भी जारी रहेगा। वैसे, केदार यात्रा दीपावली के बाद भैयादूज तक चलती है। भैयादूज के दिन कपाट बंद होते हैं।
शव मिलने की सूचना मिली तो दौड़ पड़े
केदारघाटी की आपदा को एक साल बीत चुका है। कई लोग तब से लापता हैं। इस बीच हाल में केदारघाटी क्षेत्र में कुछ मानव कंकाल मिले हैं।
इसके बाद लापता लोगों के परिजन उत्तराखंड का रुख करने लगे हैं। इनमें से कुछ दून तो कुछ ऋषिकेश पहुंचे हैं। अधिकतर अब केदारनाथ की ओर जाना चाहते हैं। उन्हें उम्मीद है कि वहां आपदा में लापता अपनों का कुछ सुराग मिल सकता है।
केदारघाटी में शव मिलने की खबर पढ़कर यूपी के जिला रायबरेली के डलमऊ क्षेत्र के रहने वाले प्रमोद कुमार और नरेंद्र सिंह दून पहुंच गए। उनके पिता राम अवतार बीते साल तीर्थयात्रा पर निकले थे, लेकिन फिर कभी घर नहीं लौटे।
केदारनाथ जाएंगे, वहां पता करेंगे
दोनों कलेक्ट्रेट में अधिकारियों से मिले और फिर ऋषिकेश रवाना हो गए। बताया कि केदारघाटी में जब भी कोई शव, कंकाल मिलने की बात पता चलती है, मन आशंकाओं में घिर जाता है। बताया कि अब वे केदारनाथ जाएंगे, वहां पता करेंगे।
यूपी के ही बस्ती निवासी अनिल पांडेय के पिता और 20 अन्य लोग आपदा में लापता हो गए थे। बताया कि जब आपदा आई तो सभी लोग केदारघाटी में थे। इसी तरह प्रतापगढ़ के रहने वाले राजेश गुप्ता अपने परिवार को ढूंढ रहे हैं।
आपदा में उनके माता-पिता, चाचा, चाची और बुआ लापता हो गए। कहते हैं कि आपदा प्रभावित हर थाने में जा चुके हैं, लेकिन कुछ पता नहीं चला। अब शव मिलने की सूचना पर आशंकाएं साथ लिए फिर उत्तराखंड पहुंचे हैं। हालांकि, उन्हें आस है कि परिजन अब भी जिंदा हो सकते हैं।