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केदारघाटी: यात्रा तो शुरू हुई, पर जिंदगी रुकी है

Sat, 14 Jun 2014 08:45 PM IST
अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Sat, 14 Jun 2014 08:45 PM IST
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kedarnath valley people life in bad condition

पिछले साल 16/17 जून को आए जलप्रलय के बाद प्रदेश सरकार ने भले ही केदारनाथ यात्रा दोबारा शुरू करा दी और केदारनाथ हाईवे का सुधारीकरण हो गया हो लेकिन स्थानीय लोगों की समस्याएं जस की तस हैं।

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केदारनाथ यात्रा के बहुत कम चलने से यात्रा मार्ग पर स्थित व्यवसायियों का व्यवसाय चौपट हो गया है।

लोगों का रोजगार उजड़ा
केदारनाथ धाम में होटल-लॉज, दुकान और तीर्थ पुरोहित का काम करने वाले केदारघाटी के लोगों की एक साल से एक रुपये की कमाई नहीं हुई है।

सरकार ने धाम में पूजन सामग्री की दुकान चलाने के लिए तीन टेंट दिए हुए हैं। जबकि मंदिर के इर्द-गिर्द लॉजों पर ताले लटके हुए हैं या उनके अंदर मलबा भरा हुआ हैं। श्रद्धालुओं की संख्या बहुत कम होने के कारण यजमानी का काम भी नहीं चल रहा है।
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दुकानों को यात्रियों का इंतजार
पैदल मार्ग पर सिर्फ जंगलचट्टी में दो स्थानीय लोगों ने ढाबा खोला है। गौरीकुंड में भी कुछ दुकानें खुली हैं लेकिन उनको भी यात्रियों का इंतजार करना पड़ रहा है। गौरीकुंड से केदारनाथ तक सबकुछ सरकारी व्यवस्थाओं के भरोसे है।
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इसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी नहीं है। घोड़े-खच्चर मजदूर वापस लौट रहे हैं, जबकि डंडी तो इस साल चली ही नहीं। सीतापुर, रामपुर, बड़ासू, फाटा और गुप्तकाशी में बाजार सूने हैं। कई व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान खोले ही नहीं हैं।

गुप्तकाशी के समीप भूधंसाव की समस्या झेल रहे सेमी गांव में कई लोग अपने घरों में रह रहे हैं। जबकि शासन ने न्यू सेमी विलेज नाम से पूरे गांव को विस्थापित करने की बात की थी।

बस्तियों पर मंदाकिनी का खतरा
चंद्रापुरी, अगस्त्यमुनि, सिल्ली, चाका, गंगानगर, बेडूबगड़, सौड़ी, तिलवाड़ा और सुमाड़ी में मंदाकिनी नदी से बस्तियों की सुरक्षा के लिए सिंचाई विभाग की तरफ से बनाई जा रही सुरक्षा दीवारों की निर्माण की गति बहुत धीमी है।


सरकार ने यात्रा को देखते हुए केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग और मयाली-गुप्तकाशी मोटर मार्गों के सुदृढ़ीकरण को प्राथमिकता में रखा।

वहीं विजयनगर-डडोली-बसुकेदार, और विजयनगर-तैला जैसे दर्जनों गांवों को जोड़ने वाले मोटर मार्गों की हालात शुरुआत में ही खतरनाक बनी हुई है। बरसात शुरू होने पर इन मार्गों के बंद होने का खतरा बना हुआ है।

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