फिर 'संकट' में आपदा से जख्मी केदारनाथ मंदिर
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आपदा से जख्मी केदारनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य बदरी-केदार मंदिर समिति की आपत्ति में फंस गया है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के कार्य से असंतुष्ट मंदिर समिति के रुख की वजह से मंदिर के भीतर मारबल का फर्श पूरी तरह नहीं बिछाया जा सका है।
केवल अंतराल का काम हुआ है। समिति की शर्त यह है कि फर्श ऐसा हो, जिस पर कोई फिसले नहीं। वहीं, वुडन फ्लोरिंग को लेकर भी समिति को आपत्ति है।
वह चाहती है कि वुडन फ्लोरिंग ‘फायर प्रूफ’ हो, एएसआई का कहना है ऐसा संभव नहीं। कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके, इसके लिए एएसआई ने अब एमओयू बनाकर काम करने का फैसला लिया है। इसकी तैयारी भी शुरू हो गई है। डॉक्यूमेंट की इबारत तैयार की जा रही है।
ऐसी कोई लकड़ी नहीं, जो फायर प्रूफ हो
एएसआई के एक उच्चाधिकारी की मानें तो मंदिर के भीतर अग्निशामक उपकरणों का प्रयोग तो किया जा सकता है, लेकिन ऐसी कोई लकड़ी नहीं, जो फायर प्रूफ हो।
वुडन फ्लोरिंग के साथ केवल सावधानी के ही उपाय किए जा सकते हैं। समिति की आपत्तियों को अव्यावहारिक बताते हुए उन्होंने कहा कि इनकी वजह से मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य न रुके, इसके लिए ही एमओयू तैयार करने का निर्णय लिया गया है।
‘हम एमओयू तैयार करा रहे हैं। सब कुछ लिखित में होगा। मंदिर समिति एक करार से बंध जाएगी तो उसके बाद कार्य में व्यवधान नहीं हो पाएगा’।
- अतुल भार्गव, अधीक्षण पुरातत्वविद्, एएसआई (दून सर्किल)
‘हमने तो अपनी राय एएसआई को दी है। बताया है कि मंदिर में दीये जलते हैं, पूजा होती है। वुडन फ्लोरिंग कहीं आग न पकड़ ले, इसका प्रबंध होना चाहिए’।
- गणेश गोदियाल, श्रीनगर विधायक (अध्यक्ष, बदरी-केदार मंदिर समिति)