20 अप्रैल तक केदारनाथ रूट हो जाएगा तैयार!
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दावा किया कि पांच मई से पहले केदारनाथ यात्रा रूट सुरक्षित यात्रा के लिए तैयार हो जाएंगे।
20 अप्रैल तक यह सारा काम पूरा कर लिया जाएगा। यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार हर स्तर पर तैयारी कर रही है।
चार धाम यात्रा पूरी तरह सुरक्षित होगी
होली के रंग में पुनर्निर्माण की चिंता का रंग घोलते हुए रावत ने कहा कि प्रदेश सरकार हर हाल में यह संकेत अन्य राज्यों को देना चाहती है कि इस बार की चार धाम यात्रा पूरी तरह से सुरक्षित होगी।
पूरी तरह से सुरक्षित होगी यात्रा
रावत के मुताबिक मौसम की तरफ से सिर्फ एक माह का समय भी निर्माण कार्य के लिए मिल गया तो सरकार यात्रा को पूरी तरह से सुरक्षित बना लेगी।
केदारनाथ रूट के अतिसंवेदनशील हिस्से का एक चौथाई काम पूरा हो चुका है। बीआरओ और पीडब्ल्यूडी मिलकर काम कर रहे हैं। सड़क मार्ग के अलावा नेटवर्क या फोन और बिजली की कनेक्टिविटी पर भी सरकार काम कर रही है।
यात्रा के दौरान कनेक्टिविटी बनी रहे इसके लिए बीएसएनएल से जाल मल्ला, मकोट और त्रिजुगीनारायण में तीन टावर लगाने को कहा गया है। करीब बीस सेटेलाइट (डीएसटीपी) फोन हैं और 100 फोन और खरीदे जा रहे हैं।
शतप्रतिश होगा पंजीकरण
यात्रियों का शतप्रतिश पंजीकरण होगा। केदारनाथ में पुलिस से कहा गया है कि वाच टावर भी स्थापित करे जिससे तकनीक के अलावा भी स्थितियों पर नजर रखी जा सके।
रूट को सही करने के अलावा नदी में बाढ़नियंत्रण का काम भी शुरू किया जा चुका है। कैलाश मानसरोवर यात्रा रूट को भी सुरक्षित बनाने का काम प्रदेश सरकार ने शुरू कर दिया है।
केएमवीएन और जीएमवीएन को कम से कम काम के मामले में एक-दूसरे का सहयोग करते हुए काम करने को कहा गया है। ट्रेकिंग रूट को दुरस्त करने की पूरी कार्ययोजना बना ली गई है।
चार धाम यात्रा के दौरान यात्रियों की संख्या को नियमित किया जाएगा। रावत के मुताबिक केदारनाथ में यात्रा सीजन के दौरान निजी हैलीकाप्टर सेवा जारी रखने पर बाद में फैसला किया जाएगा।
बीआरओ से पूरा तालमेल
मुख्यमंत्री के मुताबिक बीआरओ के साथ ही मिलकर प्रदेश सरकार काम कर रही है। बीआरओ ने यात्रा मार्ग पर जो डेंजर जोन गिनाए हैं, उन्हे प्रदेश सरकार संवेदनशील क्षेत्र कहना ज्यादा पसंद करेगी।
डेंजर जोन कहने पर यह संदेश भी जाता है कि यात्रा मार्ग सुरक्षित नही है। इसके उलट ये जोन ऐसे हैं जहां भूस्खलन अधिक है।
ऐसे में इन क्षेत्रों में यात्रा के दौरान भारी मशीनरी और मानव बल की तैनाती रहेगी जिससे रूट बंद भी हो तो तुरंत खुलवाया जा सके। इस स्थानों पर वैकल्पिक पैदल मार्ग भी बनाया जाएगा जिसके दोनों तरफ वाहन रहेंगे।