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कैसे बदलेगी केदारनाथ की तस्वीर, ये है ब्ल्यूप्रिंट

Mon, 03 Nov 2014 09:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 03 Nov 2014 09:40 PM IST
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kedarnath reconstruction blueprint.

केदारनाथ में पुनर्निर्माण को अंजाम देने के लिए लोक निर्माण विभाग, सिंचाई और आपदा प्रबंधन विभाग की एक विशेष डिवीजन बनाने की तैयारी है।

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इसी तरह उत्तरकाशी में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की तर्ज पर मुन्स्यारी में भी सरकार पर्वतारोहण संस्थान खोलेगी। सोमवार को केदारनाथ पुनर्निर्माण पर आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यह खुलासा किया।
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कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी की मौजूदगी में हुई इस बैठक में प्रदेश सरकार ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में निर्माण का पूरा खाका सामने रखा।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बताया कि प्रदेश सरकार ने चार धाम के कपाट बंद होने के बाद साहसिक पर्यटन के तहत चार धाम क्षेत्र को आर्थिकी से जोड़ने की योजना तैयार की है। शीतकाल यात्रा भी शुरू की गई है।
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हिमालय दर्शन की भी कार्ययोजना तैयार की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीर्थ पुरोहितों को विश्वास में लेकर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 60 हेलिपेड चिन्हित किए गए हैं जिनमें से 12 का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। एसडीआरएफ की दो अन्य कंपनियों का गठन किया जा रहा है।

यह है पुनर्निर्माण की कार्ययोजना

kedarnath reconstruction blueprint.

पहली बार कपाट बंद होने के बाद भी 400 से अधिक लोग वहां काम में लगे हैं। आपदा में 2500 लोग बेघर हो गए थे जिनमें से 2400 लागों के आवास बन गए है। इस साल चारधाम यात्रा पर चार लाख से अधिक श्रद्धालु आए। राज्य सरकार अब धारचूला में भी अपना ध्यान अधिक केंद्रित करेगी। उत्तरकाशी में नदी में मलबा अधिक आने से उत्तरकाशी शहर को खतरा देखते हुए मलबा हटाने का काम एनडीएमए के तहत किया गया। सचिव अमित नेगी ने बताया कि नदी रिचैनलाईज की गई और दोनों तरफ  चार किमी तक आरसीसी दीवार बनाई गई।

-केदारनाथ मंदिर के पीछे की तरफ निर्माण कार्य नहीं होगा।
-तीर्थपुरोहितों से बातचीत के बाद बायी व दायीं तरफ  खाली जगह छोड़ी जाएगी। सामने की तरफ एक गलियारा रखा जाएगा।
-केदारनाथ में प्रभावितों के पुनर्वास के लिए छह हेक्टेयर भूमि की जरूरत है। सरकार के पास नौ हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है।
-त्रिजुगीनारायण और चैमासी में वैकल्पिक मार्ग वन विभाग तैयार करेगा।
-सरस्वती और मंदाकिनी को रिचैनलाईज किया गया है।
-मंदिर के पीछे की तरफ  तीन स्तरीय सुरक्षा दीवार बनेगी। भूस्खलन क्षेत्रों का उपचार होगा। सोनप्रयाग से गौरीकुं ड तक मोटरमार्ग है। इसके बाद पैदल मार्ग तैयार किया गया है।
-रामबाड़ा से लिंचौली और लिंचौली से केदारनाथ तक दो चरणों में रोपवे बनेगा।
-नदियों के दोनों तरफ आरसीसी दिवारें बनेंगी। बायो टॉयलेट भी बनाए जा रहे हैं।

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