Kedarnath: आपदा के 15 दिन बाद लिनचोली में मिले तीन में से दो शवों की हुई पहचान, सर्च अभियान जारी
Kedarnath News: 31 जुलाई देर रात को बादल फटने के बाद आई आपदा से पैदल मार्ग समेत यात्रा पड़ावों पर बड़ी संख्या में यात्री और स्थानीय लोग फंस गए थे। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ के साथ ही पुलिस व सेना के जवान यहां रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे थे।
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गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर चल रहे सर्च अभियान के दौरान लिंचोली में बोल्डरों के बीच भारी मलबे से तीन शव बरामद किए गए हैं। 15 दिन बाद मिले शवों की हालत काफी खराब बताई जा रही है। हालांकि दो शवों की शिनाख्त हो गई है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार के नेतृत्व में शवों को पंचनामा व पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग लाया गया है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि दो शवों की शिनाख्त हो गई है। इन दोनों की गुमशुदगी सोनप्रयाग कोतवाली में दर्ज हुई थी। इसके अलावा एक अन्य शव की शिनाख्त नहीं हो पाई है। उन्होंने बताया कि आधार कार्ड के आधार पर शवों की शिनाख्त कर परिजनों को भी सूचना दे दी गई है। उन्होंने बताया कि सर्च अभियान जारी रहेगा।
दोनों मृतक उत्तरप्रदेश के रहने वाले
दोनों मृतक यूपी के रहने वाले थे। दोनों की पहचान कृष्ण पटेल पुत्र लाल बहादुर पटेल, निवासी जय पालपुर, रामनगर, उत्तर प्रदेश और सुमित शुक्ला पुत्र राम विवेक शुक्ला, निवासी अर्चना एनक्लेव, खोड़ा, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है।
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बता दें कि 31 जुलाई देर रात को बादल फटने के बाद आई आपदा से पैदल मार्ग समेत यात्रा पड़ावों पर बड़ी संख्या में यात्री और स्थानीय लोग फंस गए थे। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ के साथ ही पुलिस व सेना के जवान यहां रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे थे। करीब नौ दिन चले रेस्क्यू अभियान के दौरान करीब 13,000 यात्रियों को सुरक्षित निकला गया था। रेस्क्यू पूरा होने के बाद भी यहां सर्च अभियान चल रहा है। एसडीआरएफ के सर्च प्रभारी यशपाल सिंह रावत के नेतृत्व में बृहस्पतिवार 15 अगस्त को जवानों ने यहां भारी बोल्डरों को हटाया। करीब सात घंटे की मशक्कत के बाद कई फीट मलबा हटाने के बाद यहां से तीन शव बरामद हुए।
मौसम खराब, नहीं पहुंचा हेलिकॉप्टर
लिनचोली में तैनात पुलिस चौकी प्रभारी राजबर सिंह राणा की मौजूदगी में शवों को आपातकालीन हेलिपैड भीमबली लाया गया था, लेकिन मौसम खराब होने के कारण उन्हें हेलिकॉप्टर से जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग नहीं पहुंचाया जा सका। इधर, शुक्रवार को भी हेलिकॉप्टर का करीब तीन-चार घंटे इंतजार किया गया, लेकिन मौसम साफ नहीं होने पर जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार के नेतृत्व में डीडीआरएफ के जवान शवों को पैदल मार्ग से सोनप्रयाग लेकर पहुंचे। यहां से सड़क मार्ग से शवों को जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग लाया गया, जहां शनिवार को पंचनामा के बाद पोस्टमार्टम किया जाएगा।