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केदारनाथ में अब एक साल बाद होगी शवों की तलाश

Sat, 16 Nov 2013 08:41 AM IST
अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Sat, 16 Nov 2013 08:41 AM IST
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kedarnath disaster dead body

उत्तराखंड में केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही धाम में सभी गतिविधियां ठप हो गई हैं। ऐसे में मलबे में दबे शवों के निकालने का काम भी बंद हो गया है। अब अगले साल ही दोबारा मलबे की सफाई का कार्य हो पाएगा।

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अब सफाई कब और कैसे होगी, इसका फैसला शासन को करना है। गौरतलब है कि केदारघाटी में 16/17 जून के जलप्रलय में हजारों लोगों की जान चली गई थी। घटना के दिन अकेले केदारनाथ धाम में पांच हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी बताई गई थी। इनमें से सैकड़ों लोग बाढ़ में बह गए या मलबे में दब गए।
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अब तक 500 शव ही बरामद
सरकार ने मलबे से शवों की तलाश के लिए पुलिस और एनडीआरएफ की टीम को लगाया था। खोज में केदारघाटी में लगभग 500 शव ही बरामद हो पाए। केदारनाथ धाम में मंदाकिनी नदी और गांधी सरोवर से आया मलबा और भवनों कामलबा बिखरा हुआ है। इस मलबे में शव (कंकाल) दबे हुए हैं।
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जहां बिना मशीनों के मलबे से ढूंढ-खोज का कार्य हो सकता था, वहां सरकार ने शवों का निकालने का काम किया, लेकिन बाकी काम छोड़ दिया गया। ईपीआईएल ने अपने स्तर से धाम में मलबा हटाने की बात कही थी। उसकी पोकलैंड मशीनों को एमआई-26 हेलीकॉप्टर से केदारनाथ पहुंचाया जाना था। लेकिन न तो एमआई हेलीकाप्टर आया और न ही मशीन केदारनाथ पहुंच पाई।


अभी भी दर्जनों भवन मलबे से दबे
केदारनाथ प्रवेश पर प्रतिबंध हटाए जाने के बाद स्थानीय व्यापारी और तीर्थ पुरोहितों ने जब अपने भवनों का मलबा हटाया तो शव मिलने शुरू हो गए। अभी दर्जनों ऐसे भवन हैं, जो पूरी तरह से मलबे से दबे हुए हैं। अब यदि अगले वर्ष मशीनों से केदारनाथ में मलबे की सफाई होती है तो शवों के मिलने की उम्मीद कम हो जाएगी क्योंकि तब तक 10 माह से अधिक समय बीत चुका होगा और मशीन द्वारा हटाए गए मलबे में कंकालों का मिलना मुश्किल होगा।

जब तक वक्त था सरकार ने शवों को ढूंढने का काम नहीं किया। सरकार लोगों का ध्यान भटकाने के लिए धाम में दूसरे काम करती रही।
विक्रम कंडारी, मीडिया प्रभारी

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